Srishti Khanda Extracted Page 889
Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-889
Sanskrit Original
न श्रीपद्ममहापुराण पुराणमेतत्कथितं तीर्थश्राद्धानुवर्णनम् । श्रृणोति यः पठेद्वापि श्रीमान् संजायते नरः ॥४२॥ सर्वपापविनिर्मुक्तः सलक्ष्मीक हरिं लभेत्। इदं महाराज अगादि तुभ्यं पुण्यं महापातकनाशनं च॥४३॥ ब्रह्मार्करुद्रैश्चसुपूजितं च श्रोतव्यमेतत्प्रवदंति तज्ज्ञाः -। सृष्टिखंडमिदं राजन् मया तुभ्यं प्रकीर्तितम् ॥४४॥ पुराणस्यादिभूतं च नवधासृष्टिपौष्करम् । द्विजेभ्यः श्रावयेद्विदवान्यश्च वैश्ृणयात्पठेत् ॥ कल्पकोटिशतं साग्रं ब्रह्मलोके समोदते ॥४ ५॥ इति श्रीपद्ममहापुराणे प्रथमे सृष्टिखंडे पुराणावतारे ग्रहार्चनवर्णनं नाम द्वयशीतितमोऽध्यायः ॥८ २॥ सृष्टिखंडं समाप्तम् | te ही पूरी हो जाती हैं, उसके लिए वही तप है । यही उसके लिए पवित्र पुण्य आयु को बढाने वाला तथा पापों को विनष्ट करने वाला है ॥४१॥ इस वर्णित पुराण में तीर्थो तथा श्राद्धों का वर्णन किया गया है । जो इस पुराण कोपढता अथवा सुनता हे वह ऐश्वर्य सम्पन्न हो जाता हे ।।४२॥ वह सभी पापों से मुक्त होकर श्रीहरि को प्राप्त कर लेता हे । हे महाराज ! आपको यह में अत्यन्त पवित्र तथा पापों को विनष्ट करने वाला पुराण सुनाया ॥४३॥ यह पुराण ब्रह्म, रुद्र तथा सूर्य से पूजित है । पुराण पुरुष इसको सुनने योग्ये बतलाते हैं । हे महाराज ! मैंने आपको सृष्टिखण्ड ˆ सुनाया है ॥४४॥ यह पद्मपुराण का प्रथम खण्ड है । इसमें ब्रह्माजी की नव प्रकार की सृष्टियों का वर्णन है । विद्वान् को चाहिए कि वह इसे ब्राह्मणों को सुनाये तथा जो इसे सुनता अथवा पढता है वह ब्रह्माजी के लोक में सौ कल्पों से भी अधिक काल तक सुख पूर्वक निवास करता है ॥४५॥ इसतरह श्रीपद्ममहापुराण के प्रथम सृष्टिखण्ड के पुराणावतार तथा ग्रहों की पूजा वर्णन नामक वयासीवें अध्याय का शिवप्रसाद द्विवेदी (श्रीधराचार्य) कृत हिब्दी अनुवाद सम्पूर्ण हुआ ।।८ २।। इसतरह पद्ममहापुंराण का सृष्टिखण्ड सम्पूर्ण हुआ । — ke
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