Srishti Khanda Extracted Page 876
Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-876
Sanskrit Original
SS ESS SS सृष्टिखण्ड ८५१ य इदं पठते विप्रस्तस्यानंतफलं भवेत् । तपस्विनां च विप्राणां देवानामग्रतः सुधीः ॥६४॥ यः पठेत्पाठयेद्वापि सुरलोके महीयते ॥६५॥ इति श्रीपद्ममहापुराणे प्रथमे सृष्टिखंडे सूर्यशांति्नामाष्टसप्ततितमोऽध्यायः ॥७८॥ "ण्ोई९---- उनासीवा अध्याय व्यास उवाच मध्यदेशे स्वराद् सम्राट् भद्रेश्वर इति श्रुतः | तपोभिर्बहुभिः पूतो ब्रतैर्नानाविधैरपि ॥१॥ देवांस्तुपूजयेन्नित्यं सुभावेन सदा खलु। तस्य सव्येऽभवत्कुष्ठं करे श्वेतमजायत॥२॥ ततोभिषक्प्रयोगाच्च लक्षणं दृश्यते पुरा । आहूय द्विजमुख्यांश्च मंत्रिणः सोब्रवीद्वचः ॥३॥ राजोवाच किल्बिषं मे करे विप्रा दुःसहं लोकगर्हितम् । तस्मात्पुण्यं महाक्षेत्रं यत्र त्यक्ष्यामि विग्रहम् ॥४॥ अज्ञापयत धर्मज्ञाः परलोकहिताय वै । वंशहीनस्य मे वीराः प््रेत्यामुत्रहितं च यत्॥५॥ तदब्रूत सुप्रसन्ना म उद्दिष्टं यत्करोम्यहम्। द्विजा ऊचुः परित्यक्ते त्वया राष्ट्रे धर्मशीलेन धीमता ॥६॥ नष्टं जगदिदं राजंस्तस्मान्नो वक्तुमर्हसि। अयमस्य प्रतीकारो हास्माभिरवगम्यते।॥७॥ समय, पूजा में, ब्राह्मण भोजन के समय ब्राह्मणों के सामने ॥६३॥ जो विप्र पाठ करता है उसको अनन्त गुना फल प्राप्त होता है तपस्वियों, ब्राह्मणों तथा देवताओं के समक्ष जो बुद्धिमान ॥६४॥ इसका पाठ करता है या पढवाता है, वह देवलोक में पूजित होता है ॥६५॥ इस तरह श्रीपद्ममहापुराण के प्रथम सृष्टिखण्ड के सूर्यशान्तिनामक अठहत्तरबें अध्याय का शिवप्रसाद द्विवेदी (श्रीधराचार्य) कृत हिन्दी अनुवाद सम्पूर्ण हुआ ।। ७८।। —— Se भद्रेश्वर नामक मध्य देश के राजा की कथा व्यासजी ने बतलाया-- मध्यदेश में भद्रेश्वर नामक एक चक्रवती राजा था । वह अनेक तपस्याओं तथा अनेक ब्रतों के कारण पवित्र था ॥१॥ वह सुन्दर भाव पूर्वक देवताओं की पूजा करता था । उसके बायें हाथ में श्वेत कुष्ठ हो गया ॥२॥ उसने वैद्यं के प्रयोग से कुष्ठ के लक्षण को जानकर श्रेष्ठ ब्राह्मणों तथा मन्त्रियो को बुलाकर कहा।।३।। राजा ने कहा-- हे ब्राह्मणों ! मेरे हाथ में लोकनिन्दित रोग उत्पन्न हो गया है । आपलोग उस पुण्य क्षेत्र को मुझे बतलायें जहाँ पर जाकर में अपना शरीर त्याग करूँ और मेरा परलोक भी बन जाय । मैं वंशहीन हूँ, अतएव मरने के बाद परलोक में कल्याणकारी जो हो उसे आप बतलाएँ मैं वही करूंगा । ब्राह्मणों ने कहा- आप धर्मशील है, आपके राष्ट्र का परित्याग कर देने पर संसार नष्ट हो जायेगा ॥४-६॥ यह राज्य भी नष्ट हो जायेगा,
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