Srishti Khanda Extracted Page 851

Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-851

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Sanskrit Original

चकार भस्मसात्सद्यो ब्रह्मादीनां च पश्यताम् । दैत्यांतकरणं रौद्रं चक्रं चागमदच्युतम् ॥८७॥ ततो ब्रह्मादयो देवाः शक्रमुख्याश्च लोकपाः । दृष्ट्वा च विजयं विष्णोः स्तुवंति स समागताः ॥८ ८॥ देवा ऊचुः नताः स्म विष्णुं जगदादिभूतं सुरासुरेंद्र जगतां प्रपालकम् । यन्ञाभिपद्यात्किलपद्ययोनिर्बभूव तं वै शरणं गताः स्मः ॥८ ९॥ नमो नमो मत्स्यवपुर्धराय नमोस्तु ते कच्छपरूपधारिणे । नमः प्रकुर्मश्च नृसिंहरूपिणे तथा पुनर्वामनरूपिणे नमः ॥९०॥ नमोस्तु ते क्षत्रविनाशनाय रामाय रामाय दशास्यनाशिने । प्रलंबहंत्रे शितिवाससे नमो नमोस्तु बुद्धाय च दैत्यमोहिने ॥९ १॥ म्लेच्छांतकायापि च कल्किनाम्ने नमः पुनः क्रोडवपुर्धराय । जगद्धितार्थं च युगे युगे भवान् बिभर्ति रूपं त्वसुराभवाय ॥९ २॥ निषूदितोऽ यं ह्यधुना किल त्वया दैत्यो हिरण्याक्ष इति प्रगल्भः । यश्चेंद्रमुख्यान्किललोकपालान् सहेलया चैव तिरश्चकार ॥९३॥ स वै त्वया देवहितार्थमेव निपातितो देव वर प्रसीद । त्वमस्य विश्वस्य विसर्गकर्ता ब्राह्मेण रूपेण च देवदेव ॥९४॥ अतो भवानेव च विश्वकारणं न ते परं जीवमजीवमीश । यत्किंच भूतंच भविष्यरूपं प्रवर्त्तमानंच तथैवरूपम् ॥९५॥ न स र NRCC टी Wc को ब्रह्मा आदि के सामने ही भस्म कर दिया । तदनंतर दैत्यों को मारने वाला भयङ्कर वह चक्र भगवान् विष्णु के पास आ गया ॥८७॥ उसके बाद ब्रह्मा आदि देवता तथा इन्द्र आदि लोकपाल, वहाँ आकर भगवान् विष्णु की स्तुति करने लगे ॥८८॥ देवताओं ने कहा-- हमलोग जगत् के आदि कारण भगवान् विष्णु को नमस्कार करते हैं । सुरों तथा असुरों के स्वामी संसार के पालक को नमस्कार करते हैं । जिनसे पद्मयोनि ब्रह्माजी उत्पन्न हुए उन भगवान् विष्णु को हम नमस्कार करते हैं ॥८९॥ मत्स्य शरीर धारण करने वाले श्रीभगवान् को बारम्बार नमस्कार है, कच्छप शरीर धारण करने वाले आपको नमस्कार है । हमलोग नृसिंह रूप धारण करने वाले श्रीभगवान् को नमस्कार करते हैं तथा वामन रूप धारण करने वाले श्रीहरि को नमस्कार करते हैं ॥९०॥ क्षत्रियों का विनाश करने वाले परशुरामजी कोनमस्कार है, तथा रावण का विनाश करने वाले श्रीराम को नमस्कार है । प्रलम्बासुर का नाश करने वाले बलरामजी को नमस्कार है । दैत्यों को मोहित करने वाले बुद्ध रूपधारी श्रीभगवान् को नमस्कार है ॥९ १॥ म्लेच्छों का विनाश करने वाले भगवान् कल्कि को नमस्कार है । तथा सूकर रूप धारण करने वाले श्रीभगवान् को नमस्कार है । आप जगत् का कल्याण करने के लिए प्रत्येक युग में असुरों का नाश करने के लिए विविध शरीरों को धारण करते हैं ॥९२॥ इस समय आपने हिरण्याक्ष का वध किया है । उसने इन्द्र आदि देवताओं का अपमान पूर्वक तिरस्कार किया था॥९३॥ देवताओं का कल्याण करने के लिए उसको आपने मारा है । हे देवश्रेष्ठ ! आप प्रसन्न होइये । आप हीसंसार की समृद्धि ब्रह्मारूप धारण करके करते हैं ॥९४॥ प्रत्येक युग में आप ही संसार की रक्षा करते हैं और अनेक मनोहर रूपों की धारण करते हैं । आप ही प्रलय काल के समय में काल, अग्नि तथा शङ्करजी का रूप धारण करके संसार का संहार करते हैं ॥९५। अतएव आप ही सम्पूर्ण जगत् के अभिन्न निमित्तोपादान कारण हैं। हे ईश!

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