Srishti Khanda Extracted Page 846
Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-846
Sanskrit Original
स पपात धरापृष्ठे गतासुलेहितोक्षित: । तथारण्यं सुघोरं च अघोरं घोरमेवच ॥८॥ चतुरो गणमुख्यांश्च शक्ता बिभेद संयुगे । सेनान्यश्चैव प्रत्येकं पातयामास लाघवात् ॥९॥ सौरभं शरसंधैश्च जयंतो वशमानयत्। शक्तिहस्तं चसंह्वादं यमदंडं नरान्तकम् ॥१०॥ हत्वा च पातयामास सभस्मीकृतविग्रहः। कालश्च खड्गपातेन पातयामास बाभ्रवम् ॥१९॥ शक्तथा मृत्युर्बिभेदाश्वं तथानिर्घृणकं रणे । अम्निना दह्यामानाश्च सप्तैते च महाबलाः ॥९२॥ भद्रबाहु र्महाबाहुः सुगंधो गंध एव च । भौरिको वल्लिको भीम एते सेनाग्रगामिनः ॥९३॥ रणे सदग्धदेहाश्च॒ पेतुरुव्या गतासवः। पाशबद्धा महावीर्या वरुणस्य महात्मनः ॥१४॥ पेतुरुर्व्यां महासत्वाः शूराः शूरभयानकाः। शूरस्य रश्मिजालेन निहताः पञ्च दानवाः॥१५॥ तुरुतुंबुरुदुर्मेधस्साधकासाधकाभिधाः । क्रूरक्रौचरणेशानमोदसंमोदषण्मुखाः ॥१६॥ शरैर्निपातिता दैत्याः संयुगे मातरिश्वना । नैत्रऋहतो गदया भीमं पातयामास भूतले ॥१७॥ शूलपातैश्च रुद्राणां शतशो दैत्यदानवाः। निपेतुः संयुगे भीताः संमुखा रणपंडिताः ॥१८॥ वसूनां शरपातैश्च शूराणां रश्मिमालिनाम्। मेघानां करकाभिश्च वब्रपातैस्सुदारुणैः॥१९॥ निपातिता रणे दैत्याः शतशो बलशालिनः । कुबेरस्य गदापातैर्निपतंति सहस्रशः ॥२०॥ शक्रस्य भिदुरेणैव भेदिता दैत्यपुंगवाः । असंख्याताः पतंत्युर्व्यां स्कंदशक्त्या तथाहताः ॥२९॥ गणेशपर्शुपातेन पतंति मुख्यमुख्यकाः । वैकुंण्ठकरमुक्तेन चक्रेण तीव्रकर्मणा॥२ २॥ दैत्यानां प्रवराणां च शिरांसि निपतंति कौ । शमनो यमदंडेन कोटिकोटिसहस्रशः ॥२३॥ अपातयत्तदा भूम्यां कालः खड्गेन दानवान् । मृत्युश्शक्तथा तथा दैत्यान्याशी पाशेन च परान् ॥२४॥ भेद दिया ॥७॥ उसके कारण खून से लथपथ होकर वह दैत्य पृथिवी पर गिर पड़ा । उसी तरह अरण्य, सुधीर, घोर तथा अघोर इन चारो गण मुख्यों को इन्द्र ने शक्ति के प्रहार से मार दिया । उन्होंने शीघ्रता पूर्वक दूसरे सेनानियों को भी मार गिराया ॥९॥ जयन्त ने अपने बाणों से सौरम को बाण समूह से मार दिया । शक्तिहस्त संहाद, यमदण्ड तथ नरान्तक ॥१०॥ को मारकर उसके शरीर को भस्म बना दिया । काल ने खड्ग के द्वारा बभरु के पुत्र को मार डाला ॥११॥ मृत्यु ने शक्ति के द्वारा आश्व तथा निर्घृणक को मारा । अग्नि ने भद्रबाहु, महाबाहु, सुगन्ध, गन्ध, मौरिक, बल्लिक तथा भीम इन सात सेनानायकों को जला दिया ॥१२-१३॥। युद्ध में शरीर के जल जाने से ये मरकर पृथिवी पर गिर पड़े । महात्मा वरुण के पाश में बँधे हुए महाबलवान् अत्यन्त भयानक वीर पृथिवी पर गिर पड़े । सूर्य के रश्मि समूह से पाञ्च दानव मारे गये ॥१४-१५॥ तुरु, तुम्बुरु, दुर्मेधा, साधक तथा असाधक । क्रूर, क्रौञ्च, रणेशान, मोद, संमोद तथा षण्मुख, इन छह दानवों को वायुदेव ने बाणों से मारकर गिरा दिया । नैऋत ने गदा से भीम को मारकर गिरा दिया ॥१६-१७॥ रुद्रों के त्रिशूल प्रहार से सैकड़ों दानव पृथिवी पर गिर पड़े वे युद्ध से भयभीत थे और सामने युद्ध करने में निपुण थे ॥१८॥ वसुओं के बाण प्रहारों से तथा रश्मिमाली द्वादशादित्यों तथा मेधों के भयङ्कर करकापात से ॥१९॥। सैकड़ों बलवान दैत्य गिरा दिये गये । कुबेर के गदा के प्रहार से हजारो दैत्य गिर पड़े ॥२०॥ इन्द्र के वत्र प्रहार से बिंधे हुए असंख्य दैत्य पृथिवी पर गिर पड़े । उसी तरह स्कन्द की शक्ति के प्रहार से दैत्य मारे गये ॥२१॥ गणेश के पर्शु के प्रहार से मुख्य-मुख्य दैत्य मारे गये । भगवान् विष्णु के तीव्र कर्म करने वाले चक्र से ॥२२॥ श्रेष्ठ दैत्यों के शिर कटकर पृथिवी पर गिर पड़े । यमराज ने यमदण्ड से . मारकर करोड़ों-करोड़ों दैत्यों को गिरा दिया और काल ने खड्ग से मारकर दैत्यों को गिराया । मृत्यु देव ने शक्ति
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