Srishti Khanda Extracted Page 829
Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-829
Sanskrit Original
अड़सठवाँ अध्याय | व्यास उवाच बलं च निहतं दृष्टवा नमुचिं च स्वकाग्रजम् । मुचिस्तत्राब्रवीद्वाक्यं ज्येष्ठो मे सूदितस्त्वया ॥१॥ परोक्षेणाधुनात्वं च शरर्नेष्यामि भास्करिम् । तमब्रवीन्महातेजाः शक्रः सर्वसुरार्चितः ॥२॥ शक्र उवाच भ्रातुस्ते धर्मपंथानमिदानीं लप्स्यसे ध्रुवम् । बह्वेरुष्णमविज्ञाय प्रमोहाच्छलभा यथा॥३॥ सहसा प्रविशंत्यग्नि तथा मां योद्धुमिच्छसि । एवं ब्रुवाणमिन्द्रं च जघान विशिखैस्त्रिभिः ॥४॥ सचिच्छेद त्रिभिर्बाणैः शक्रः परपुरंजयः । ततो जघान दशभिरिंद्रमैरावणं त्रिभिः ॥५॥ सप्तभिर्मातलिं छित्वा नादैरुच्चैर्ननाद ह। शक्रं प्रति पुनर्दैत्यो भ्रामयामास संभ्रमात् ॥६॥ आयसीं तां गदां कोपान्महाबलपराक्रमः । ततस्तु लाघवाच्छक्रो जघानकुलिशेन हि॥७॥ भिदुरस्यावपातेन गतासुर्निपपात ह । दनुजस्य प्रपातेन संचचाल वसुंधरा॥८॥ देवाः प्रचक्रुर्नृत्यानि दानवा विप्रदुद्रुवुः ॥९॥ इति श्रीपद्ममहापुराणे प्रथमे सृष्टिखंडे मुचिवधोनामाष्टषष्ठितमो5 ध्याय: ॥६८॥ इन्द्र के द्वारा मुचि का वध व्यासजी ने कहा-- अपने अग्रज बल तथा नमुचि को मारा गया देखकर मुचि ने कहा तुमने मेरे अग्रज को मार दिया है ॥१॥ अतएव अप्रत्यक्ष ही रहकर मैं तुमको यमलोक पहुँचा रहा हूँ । यह सुनकर देवताओं द्वारा पूजित इन्द्र ने कहा ॥२॥ तुम अपने भाई के धर्ममार्ग को शीघ्र ही प्राप्त करोगे । अग्नि की उष्णता को जाने विना तुम अज्ञान के कारण शलभ बनना चाहते हो ॥३॥ जिस तरह शलभ सहसा अगिन में प्रवेश कर जाते हैं, उसी तरह से तुम मुझसे युद्ध करना चाह रहे हो । इसतरह से कहने वाले इन्द्र को मुचि ने तीन बाणों से मारा ॥४॥ उन बाणों को इन्द्र ने अपने तीन बाणों से काट दिया ॥५॥ उसके बाद मुचि सात बाणों से मातलि को छेद कर जोर से गर्जना किया । उसके बाद उसने इन्द्र के प्रति लौहनिर्मित गदा को धारण करके भाजा । फिर इन्द्र ने शीघ्रता से उसको वद्र से मारा ॥७॥ वज्र के प्रहार से वह मर कर गिर पड़ा । उस दैत्य के गिरने से पृथिवी डोल गयी ॥८॥ देवता नृत्य करने लगे और दैत्य भाग चले ॥९॥ इस तरह श्रीपद्ममहापुराण के प्रथम सृष्टि खण्ड के मुचि वध नामक अड़सठवें अध्याय का शिवप्रसाद द्विवेदी (श्रीधराचार्य) कृत हिन्दी अनुवाद सम्पूर्ण हुआ ।। ६८।। ज
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