Srishti Khanda Extracted Page 818

Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-818

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Sanskrit Original

देवा ऊचु: हरात्मजं तु संप्राप्य पूजयित्वा गणाधिपम् । आगतास्त्वत्सकाशं वै महात्मन्नद्य केशव॥४ ३॥ व्यास उवाच एतच्छुत्वा तु देवानां वचनं हरिरव्ययः। यथातथ्यमुवाचेदं हनिष्ये दैत्यपुंगवान्॥`४४॥ श्रुत्वा वागमृतं देवा नारायणमुखाच्च्युतम् । हृष्टाश्च सुमुदाविष्टा द्रव्यैरिष्टैः समर्चयन् ॥४५॥ पुनर्विष्णुरुवाचेदं देवानिंद्रपुरोगमान् । विष्णुरुवाच स्वं स्वं बलं समाहृत्य सज्जी भवत विज्वराः ॥४६॥ हनिष्येतान् दुराचारान्बलं चैव समंततः । अस्त्रबृंद तु संगृह्य यूयंतिष्ठत निर्भयाः ॥४७॥ व्यास उवाच माधवस्य वचः श्रुत्वा प्रगताः सुरपुंगवाः । विमानानि समारुह्य सर्वे दिव्यास्त्रधारिणः ॥४८॥ देवानां हर्षवाक्यानि दैत्यचाराः श्रुतानि वै । राजानं कथयामासुर्हिरण्याक्षं महाबलम् ॥४९॥ श्रुत्वा दैत्यपतिस्तत्र चुकोपातिमहाबलः । सचिवांस्तु समाहूय क्रुद्धो वचनमब्रवीत् ॥५०॥ दैत्यराज उवाच अधुनेद्रादिदेवाश्च निखिलाः क्रूरबुद्धयः । माधवं च परीप्सन्तः शंभौ सर्वन्यवेदयन् ॥५१॥ कथं जयं च लप्स्यामो दैत्यबृंदेति दारुणे । त्रिपुरारि रुूवाचेदं गणेशं यजतामराः ॥५२॥ पूजयित्वा तु तं देवं जेष्यथासुरदानवान् । ततो देवगणैर्हष्टैः पूजितो गणनायकः॥५३॥ गणाधिपेन तुष्टेन क्रूरो दत्तो वरो महान्। जेष्यथाद्यासुरान्सर्वास्ततो देवा मुदान्विताः ॥५ ४॥ हरिनिवेदयामासुरस्मद्दधपरीप्सवः । हरेर्बाढमुपश्रुत्य रथिनः शस्त्रपाणयः ॥५५॥ Roe iort HESS POR SISOS RCTS SoS IRO PLE Si पास जाकर उनकी पूजा करके, हे महात्मन् केशव ! हमलोग आपके पास आये हैं ।४२-४३॥ व्यासजी ने कहा-- देवताओं के इस वचन को सुनकर निर्विकार रहने वाले श्रीभगवान् ने तथ्यानुसार कहा कि मैं बड़े-बड़े दैत्यां को मार दूँगा ॥४४।। भगवान् नारायण के मुख से अमृत के समान निकली हुयी वाणी को सुनकर देवता अत्यन्त प्रसन्न हुए और उन लोगों ने अभिप्रेत द्रव्यो से श्रीहरि की पूजा की ॥४५॥ उसके बाद भगवान् विष्णु ने देवताओं से फिर कहा भगवान् विष्णु ने कहा-- आप लोग बिना किसी चिन्ता के अपनी-अपनी सेना को तैयार करके सज जायँ । मैं उन दुराचारी दैत्यों के बल का हरण कर लूँगा । आपलोग अपना-अपना अस्त्र लेकर बिना किसी भय के तैयार रहें।४७।। व्यासजी ने कहा-- श्री भगवान् की बातों को सुनकर देवता चले गये । विमानों पर चढकर तथा दिव्याम्नों को धारण करके तैयार सभी देवताओं ॥४८॥ के हर्ष भरे वाक्यों को दैत्यों के गुप्तचरों ने सुना । उन सबों ने महाबलवान् अपने राजा हिरण्याक्ष से जाकर कहा ॥४९॥ उसको सुनकर दैत्यों के राजा ने अत्यन्त क्रोध किया । वह अपने मन्त्रियों को बुलाकर क्रोध पूर्वक कहा ॥५०॥ दैत्यराज ने कहा-- इस समय क्रूर बुद्धि वाले इन्द्र इत्यादि देवता, विजय को प्राप्त करने की इच्छा से सारी बातें जाकर शम्भु से कहा कि भयङ्कर दैत्य समुदाय पर हमलोग पर कैसे विजय प्राप्त करें तो त्रिपुरारि ने कहा कि जाकर तुमलोग गणेश की पूजा करो ॥५१॥ गणेशजी की पूजा करके तुमलोग दैत्यों पर विजय प्राप्त कर लोगे । उसके बाद प्रसन्न होकर देवताओं ने गणेशजी की पूजा वी॥५२-५३॥ प्रसन्न होकर गणेशजी ने उन सबों को वरदान दिया कि तुमलोग असुरों को जीत लोगे । उसके बाद

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