Srishti Khanda Extracted Page 817

Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-817

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Sanskrit Original

es श्रीपद्ममहापुराण जयदं सर्वयुद्धेषु सिद्धिदं सर्वकर्मसु । महामायं महाकायं हेरंब त्वां नताः स्म ह ॥३३॥ एकदंतं महाप्राज्ञं लबतुंडं विनायकम्। देवं महर्षिदेवानांमिंद्रस्य च नताःस्म ह॥३४॥ चत्ते पुरार्चनं यज्ञे न कृतं तत्क्षमस्व नः । व्यास उवाच सुराणां च गिरः श्रुत्वा गणपो वाक्यमब्रवीत् ॥३५॥ गणेश उवाच युष्माभिर्ब्रियतां देवा वरो मत्तो हि वांच्छितः । व्यास उवाच ततः शक्रादयः सर्वे बृहस्पतिपुरोगमाः ॥३६॥ ऊचुर्गणपतिं देवा जयोस्माकं भवत्विति । देवानां वचनं श्रुत्वा गणेशो वाक्यमब्रवीत् ॥३७॥ गणेश उवाच बाढमेव सुरश्रेष्ठा जयो वो भवतु द्रुतम् । व्यास उवाच ततो देवगणास्सर्वे हर्पनिर्भरमानसाः ॥३८॥ गणेशं पूजयामासुर्गधसारैस्तु मण्डनैः । दिव्यधूपैः सुवस्रैश्च कुसुमैर्नन्दनोद्भवैः ॥३९॥ पारिजातादिभिः पुष्पैरन्यैदेवमनोहरैः । पूजितोगणपो देवैरुवाच सुरसत्तमान् ॥४०॥ गणेश उवाच गच्छध्वं विबुधा देवं विष्णुमद्धतसाहसम् । सविधास्यति वः कामं वांच्छितं च ततः सुरा:॥४ १॥ व्यास उवाच स्वं स्वं रथं समारुह्य गतास्ते हरिमव्ययम्। पीतांबरं नमस्कृत्य ऊचुर्देवगणा मुदा ॥४२॥ नमस्कार करते हैं ॥३२॥ आप युद्धों में विजय प्रदान करने वाले और सभी कर्मों में सिद्धि प्रदान करने वाले हैं ।हे महामाया वाले, महाकाय हेरम्ब ! हम आपको नमस्कार करते हैं ॥३३॥ एकदन्त, अत्यन्त ज्ञानी, लम्बोदर तथा विनायक महर्षियों तथा इन्द्र के आराध्य आपको हम नमस्कार करते हैं ॥३४।। हमलोगों ने पहले यज्ञ में आपकी पूजा जो नहीं की उसके लिए आप हमें क्षमा करें । व्यासजी ने कहा-- देवताओं की वाणी सुनकर गणेशजी बोले।!३५॥ गणेशजी ने कहा-- हे देवताओं ! आप लोग मुझसे अपने अभीष्ट वरदान को मांगें व्यासजी ने कहा-- उसके बाद बृहस्पति को आगे करके इन्द्र आदि देवताओं ने ॥३६॥ गणेशजी से कहा कि हमलोगों को विजय प्राप्त हो जाय । देवताओं की बात को सुनकर गणेशजी बोले गणेशजी ने कहा- हे श्रेष्ठ देवताओं ! आपलोगों की विजय होगी उसके बाद सभी देवता प्रसन्न हो गये ॥३८॥ उन सबों ने गणेशजी की पूजा सुगन्धित पदार्थों सेकी तथा नन्दन वन में उत्पन्न पुष्पों, धूपं, द्वीपों तथा सुन्दर वस्रं से की ॥३९॥ पारिजात आदि तथा दूसरे सुन्दर पुष्पों से देवताआं ने गणेशजी की पूजा की तो गणेशजी बोले गणेशजी ने कहा-- हे देवताओं, आपलोग अद्धुत साहस करने वाले देवता भगवान् विष्णु के पास जायँ । वे ही आप लोगों के अभिप्रेत कार्य को पूरा करेंगे ॥४१॥ व्यासजी ने कहा-- देवता अपने-अपने रथ पर चढकर श्रीभगवान् के पास गये । उन लोगों ने पीताम्बरधारी श्रीभगवान् को प्रणाम करके प्रसत्नता-पूर्वक कहा देवताओं ने कहा-- शङ्करजी के पुत्र गणेशजी के

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