Srishti Khanda Extracted Page 816

Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-816

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Sanskrit Original

पुनः सिद्धिं पुनर्भोग्यं पुनः कीर्ति पुनर्बलम् । पूजयित्वा तु गणपं नरस्य नात्र संशयः ॥२९॥ अस्य पूजामकृत्वा च सर्वाभीष्टं विनश्यति । तत्र देवाश्चसुप्रीता ब्रह्मविष्णुहरादयः ॥२२॥ मघोनो गणपस्याथ पूजाविरहितस्य च । अथासुरै महावीयैर्हिरण्याक्षमुखै रणे॥२३॥ मधवा तु जितो वीर्याद्धिरण्याक्षेण वै तदा । ततस्सुराश्चनिवीर्या यावद्वर्षशतंपुरा॥ २४॥ दैवासुरे महायुद्धे सुराणां च पराजयः। ततो देवाधिदेवे तु शिवे देवैर्निवेदितम् ॥२५॥ देवा ऊचु भगवन्नसुरैनो हि जितं राज्यं गता मखाः । व्यास उवाच एतस्मिन्नतरे शंभुर्देवान्वचनमब्रवीत् ॥२६॥ शम्भुरुवाच हेरंबाय वरो दत्त उमया प्रीतया मया। पूजया ते परासिद्धिर्देवादीनां भवत्विति ॥२७॥ अवजानाति यो मोहात्पुरुषस्तु महोत्सवे। नभवेत्तस्य सिद्धिश्च रणे चापि पराजयः ॥२८॥ महामखे न युष्माभिः पूजागणपतेः कृता । हेलया न कृता मोहात्तस्मात्प्राप्तः पराजयः ॥२९॥ शीघ्रं गच्छत वै पुण्यां गणपस्यमहात्मनः । पूजां कुरुत धर्मज्ञा जयस्तूर्णं भविष्यति ॥३०॥ व्यास उवाच ततो हरमुखच्छुत्वा वचः क्षेमपरं हितम् । प्रहृष्टा विबुधास्सर्वे गणपरस्य पुरः स्थिताः ॥३१॥ देवा ऊचुः गणाधिप नमस्तुभ्यं सर्वदेवैकपालक । स्वर्गभोगप्रद प्रीत्या हेरंब त्वाँ नताः स्म ह ॥३२॥ वैधव्य, कार्पण्य, शोक तथा मत्सर नहीं होते हैं ॥२०॥ गणेशजी की पूजा करने वाला मनुष्य बार-बार सिद्धि भोग्य पदार्थ, कीर्ति तथा बल की प्राप्ति करता है ॥२१॥ गणेशजी की पूजा किए बिना सभी अभीष्ट वस्तुओं का नाश हो जाता है । गणेशजी की पूजा करने से ब्रह्मा, विष्णु तथा शुङ्कर आदि देवता अत्यन्त प्रसन्न होते हैं ॥२२॥ गणेशजी की पूजा नहीं करने के कारण इन्द्र महापराक्रमी हिरण्याक्ष आदि से युद्ध में ॥२३॥ पराजित हो गये । इन्द्र को हिरण्याक्ष ने अपने पराक्रम से जीत लिया । उसके बाद पराक्रम हीन देवताओं का असुरों के साथ सौ वर्षों तक युद्ध हुआ ॥२४॥ उस देवासुर संग्राम में देवताओं का पराजय हुआ इसके बाद देवताओं ने देवाधिदेव शिव से निवेदन किया ॥२५॥ देवताओं ने कहा-- हे भगवन् ! असुरों ने हमारे राज्य को जीत लिया है और यज्ञों के भाग को छिन लिया है । व्यासजी ने कहा-- उस समय शङ्करजी देवताओं से बोले शम्भु ने कहा-- गणेशजी को मैंने तथा उमा ने प्रसन्न होकर वरदान दिया है कि तुम्हारी पूजा से देवताओं को परम सिद्धि प्राप्त होगी ॥२७॥ अज्ञान के कारण जो व्यक्ति गणेशजी की पूजा महोत्सव के अवसर पर नहीं करता है, उसको सिद्धि न मिले और युद्ध में पराजय होए ॥२८॥ आपलोगों ने महायज्ञ में गणेश का पूजन नहीं किया और आज्ञानवशात् उनकी अवमानना की, इसीलिए आपलोगों को पराजय प्राप्त हुआ ॥२९॥ अतएव शीघ्र जाओ और गणेशजी की पूजा करो तब शीघ्र ही विजय मिलेगी ॥३०॥ व्यासजी ने कहा-- उसके वाद शङ्करजी के मुख से अत्यन्त कल्याणकारी वचन को सुनकर सभी देवता गणेशजी के समक्ष गये ॥३ १॥ देवताओं ने कहा-- हे गणाधिप ! आपको नमस्कार है । आप ही सभी देवताओं का पालन करने वाले हैं । प्रसन्न होकर आप स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदान करते हैं, अतएव हमलोग आपको

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