Srishti Khanda Extracted Page 736
Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-736
Sanskrit Original
भगवानुवाच वदत्येवं विधौ सा च विमृश्य क्षणमेव च। वाढमुक्तवती सा च ततस्सूर्योदयोऽभवत् ॥८ १॥ अभवद्धस्मरूपोऽसौ मुनिशापप्रपीडितः । भस्मनो मध्यतो जातो द्विजो मन्मथपीडितः ॥८ २॥ दृष्ट्वा विस्मयमापन्नाः सर्वे ते पुरवासिनः । मुदिता देवसंघाश्च जनः स्वस्थतरोऽ भवत् ॥८ ३॥ विमानेनार्कवर्णेन स्वर्लोकादागतेन च । पतिना सह सा साध्वी सुरैः सार्द्ध गाता दिवम्॥८ ४॥ एवं पतिव्रतायस्माच्छुभा चैव तु मत्समा । तेन वृत्तं च जानाति भूतं भव्यं प्रवर्तनम् ॥८५॥ य इदं आवयेल्लोके पुण्याख्यानमनुत्तमम् । तस्य पापं क्षयं याति जन्म जन्मकृतं च यत्॥८ ६॥ अक्षयं लभते स्वर्ग विबुधैः संप्रयुज्यते । ब्राह्मणो लभते वेदं जन्मजन्मसु बाडवः ॥८७॥ सकृच्छुणोति यः पूतो दुष्कृतौघाद्विमुच्यते । सुरालयमवाप्रोति स्वर्गाद्भ्रष्टो धनी भवेत् ॥८८॥ इति श्रीपद्ममहापुराणे प्रथमे सृष्टिखंडे पतिव्रतोपाख्यानं नामैकपंचाशत्तमोऽध्यायः ॥५१॥ ke बावनवाँ अध्याय द्विज उवाच माडव्यस्य मुनेर्विष्णोशूलाघातः कथं तनौ। पत्यौ पतिव्रतायाश्च कथं कुष्ठं कलेवरे॥१॥ . बाद सूर्योदय हो गया ॥८ १॥ मुनि के शाप के कारण पीडित कोढी भस्म हो गया उस भस्म के ही बीच से कामदेव के समान सुन्दर ब्राह्मण हो गया ॥८२॥ इस तरह की बात को देखकर सभी नगरवासी आश्चर्यित हो गये, सभी देवता प्रसन्न हो गये और लोग स्वस्थ हो गये ॥८३॥ सूर्य के समान देदीप्यमान विमान के द्वारा वह साध्वी अपने पति के साथ देवताओं के साथ ही स्वर्ग लोक में चली गयी ॥८४।॥ इसीलिए यह शुभा नाम की पतिव्रता भी मेरे ही समान है, अतएव वह सभी भूतकालिक तथा भविष्यत् कालिक बातों को जानती है ॥८५॥ संसार में जो व्यक्ति इस पवित्र कथा को किसी को सुनाता है, उसके जन्म जन्मान्तर के समस्त, पाप विनष्ट हो जाते हैं ॥८६।। वह अक्षय स्वर्गलोक को प्राप्त करता है तथा देवताओं द्वारा पूजित होता है । ब्रह्मण वेद ज्ञान को प्राप्त कर लेता है और वह प्रत्येक जन्मों में ब्राह्मण होता है ॥८७॥ जो इस कथा को एक बार सुन लेता हैं वह पाप समूह से मुक्त हो जाता है। वह मृत्यु के बाद देवलोक में जाता है और स्वर्ग से भ्रष्ट होने पर धनी होता है ॥८८॥ इस तरह श्रीपद़महापुराण के प्रथम सृष्टिखण्ड के पतिव्रतोपाख्यान वर्णन नामक एकावनवें अध्याय का शिवप्रसाद द्विवेदी (श्रीधराचार्य) कृत हिन्दी अनुवाद सम्पूर्ण हुआ ।।५१।। — Oe महर्षि माण्डव्य के शूलारोपण के कारण का वर्णन, दूसरे की पत्नी का बलपूर्वक हरण करने वाले के पाप का वर्णन, साध्वी स्त्रियों के माहात्म्य का वर्णन, अपात्र वर को कन्यादान करने से होने वाले पाप का वर्णन ब्राह्मण ने कहा-- हे भगवन् विष्णो ! माण्डव्य ऋषि के शरीर में शूलाघात कैसे हुआ तथा पतिव्रता के पति के शरीर में कोढ कैसे हुआ ?॥१॥ श्रीहरि ने कहा-- जब माण्डव्य बालक थे उस समय उन्होंने अज्ञान वशात्
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