Srishti Khanda Extracted Page 734

Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-734

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Sanskrit Original

एतस्मिन्नंतरे रात्रावंधकारे घनोज्नते । स्वपतिं पृष्ठतः कृत्वा प्रययौ सा पतिव्रता ॥५८॥ मांडव्यस्य तनो सङ्गात्कुष्ठिनो गंध आगतः। भगवानुवाच भग्नः समाधिस्तस्यैवं कुष्ठि संसर्गतो ध्रुवम् ॥५९॥ मांडव्य उवाच एवं येनाधुनाकृच्छ्ं कारितं गात्रवेदनम् । स एवं भस्मतां यातु प्रोदिते च विरोचने ॥६०॥ भगवानुवाच मांडव्येनैवमुक्तस्स पपातधरणी तले। ततः पतिव्रताचाह ब्रघ्नो नोदयतु ध्रुवम् ॥६१॥ दिनत्रयं गृहं नीत्वा शापाद्वेशमगता ततः । शयनीये स्थितं रम्ये धृत्वाऽतिष्ठत्पतिव्रता ॥६२॥ शप्त्वा तं च मुनिश्रेष्ठो गतोदेशमभीष्टकम् । सूरोनोदयते लोके यावच्चैव दिनत्रयम्॥६३॥ निखिलं व्यथितं दृष्ट्वा त्रैलोक्यं सचराचरम् । शतक्रतुं पुरस्कृत्य गता देवाः पितामहम् ॥६ ४॥ वृत्त॑न्यवेदयन्सर्वं॑ पद्मययोनौ दिवौकसः । कारणं च न जानीमस्त्वं तु योग्यं विधेहि नः॥६५॥ ब्रह्मोवाच पतिव्रताया यद्वृत्तं मांडव्यस्य मुनेश्च यत्। यथानोदयते व्रध्नो धाता देवेष्ववेदयत्॥६६॥ ततो देवा विमानैश्च पुरस्कृत्यप्रजापतिम्। गतास्तदंतिकं विप्र॒ तूर्णं सर्वे च भूतलम्॥६७॥ तेषां श्रिया विमानानां मुनीनां किरणैस्तथा । शतसूर्यमिवाभाति नान्यत्र च गृहोदरे ॥६८॥ प्रतित्रतोवाच हा हतास्मि कथं सूरो मद्गृहे समुपस्थितः । पता ही नहीं चला उन सबों ने उन्हें दूसरे प्रकार के भी कष्ट दिए ॥५७॥ उसी समय घने अन्धकार में वह पतिव्रता भी पीठपर बैठाकर अपने पति को उसी रास्ते से ले जा रही थी ॥५८॥ कोढी के शरीर से निकलने वाली दुर्गन्धि मुनि को लगी । उस कोढी के संसर्ग से मुनि की समाधि टूट गयी ॥५९॥ माण्डव्य महर्षि ने कहा-- इस तरह मेरे शरीर में इस प्रकार की वेदना जिसने उत्पन्न की है, वह सूर्योदय होते ही भस्म हो जाय ॥६०॥ माण्डव्य महर्षि के ऐसा कहते ही कोढी पृथिवी पर गिर पड़ा । उस समय पतिव्रता ने कहा-- अब सूर्योदय नहीं होगा ॥६१॥ उसके बाद वह अपने पति को घर लायी और तीन दिन बीत गये । वह पतिव्रता अत्यन्त मनोहर शय्या पर पति को लेटा कर उसे पकड़े रही ॥६२॥ उस कोढी को शाप देकर मुनि श्रेष्ठ माण्डव्य अपने स्थान पर चले गये । तीन दिन बीत गये किन्तु सूर्योदय हो नहीं रहा था ॥६३॥ सम्पूर्ण जगत् को दुःखी देखकर सभी देवता इन्द्र को आगे करके ब्रह्माजी के पास गये ।।६४।। देवताओं ने सारा समाचार ब्रह्माजी को बतलाया और कहा हे ब्रह्माजी ! इसके कारण का हमलोगों को पता नहीं है, आप हमें बतलायें ।॥६५॥ ब्रह्माजी ने बतलाया- कि पतिव्रता ने कैसे शाप दिया, माण्डव ऋषि ने कैसे शाप दिया ? सूर्योदय क्यों नहीं हो रहा है ? इन सारी बातों को ब्रह्माजी ने देवाओं को बतलाया ॥६६॥ हे विप्र ! उसके बाद ब्रह्माजी को आगे करके सभी देवता विमानों से उस पतिव्रता के पास पृथिवी पर आये ॥६७॥ उन देवताओं के विमानों से तथा मुनियों के तेज से उस घर के भीतर सैकड़ों सूर्य के प्रकाश के जैसा प्रकाश हो गया, किन्तु और किसी जगह वह प्रकाश नहीं था ॥६८॥ पतिव्रता ने कहा-- अरे मैं तो मारी गयी, सूर्य हमारे घर क्यों आये हैं भगवान् ने कहा-- उसके बाद उसे हंस के समान विमानों से देवता दिखायी

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