Srishti Khanda Extracted Page 713
Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-713
Sanskrit Original
दट श्रीपद्ममहापुराण हरिरुवाच स चाह तं च सर्वज्ञं वक्तुं नार्हसि दूषणम्। त्रैलोक्यमोहिनी भार्या कःपुमान् रक्षति क्षमः ॥१०४॥ राजपुत्र उवाच धरण्यां परिविज्ञाय त्वागतोऽहं तवान्तिकम् । एषा तिष्ठतु तेऽगारे ब्रजामि निजमन्दिरम् ॥१०५॥ हरिरुवाच इत्युक्ते स पुनः प्राह नगरेऽस्मिन् प्रशोभने। बहुकामुकसंपूर्णे कथं रक्षाभवेत्स्रियाः ॥१०६॥ स चोवाच पुनस्तं च कुरु रक्षां ब्रजाम्यहम् । गृहस्थस्सङ्कटादाह धर्मस्य राजपुत्रकम् ॥१०७॥ अद्रोहक उवाचकरोम्यनुचितं कार्य स्वदास्यमुचितं हितम् । सदा चैवेदूशी भार्यास्थातव्या मद्गृहे पितः ॥१०८॥ अरक्षा रक्षणे देव वदाभीष्टं कुरु प्रियम्। ममतल्पे मया सार्ध॑ शयानं भार्यया सह ॥१०९॥ मन्यसे दैवतं स्वंचोत्तिष्ठेन्नोचेत्तु गच्छतु। हरिरुवाच क्षणं विमृश्य तं प्राह राजपुत्रः युनस्तदा ॥१९०॥ राजपुत्र उवाच बाढमेतद्वचस्तात यथाभीष्ट॑ तथा कुरु । हरिरुवाच ततो भार्या जगादाथ अस्य वाक्याच्छिवाशिवम् ॥९९१९॥ कर्तव्यं च न ते दोष आज्ञया मम सुंदरिं। एतदुक्त्वा गतः सोपि भूपतेः शासनात्पितुः ॥११२॥ अनंतरं क्षपायां च यदुक्तं च तथा कृतम् । योषितोर्मध्यगः सोपि नित्यं स्वपिति धार्मिकः॥९९३॥ धर्मज्ञ और जितेन्द्रिय नहीं है ॥१०३॥ श्रीहरि ने कहा-- सर्वज्ञ ने कहा राजकुमार आप फिर मुझे दोष नहीं देंगे । त्रैलोक्य मोहिर्न* पत्नी की कौन पुरुष रक्षा कर सकता है 2॥१०४॥ राजकुमार ने कहा-- पृथिवी पर अच्छी तरह से जानकर में आपके पास आया हुँ । यह आपके घर में रहे मैं अपने घर जा रहा हूँ ॥१०५॥ श्रीहरि ने कहा-- इस तरह से राजकुमार के कहने पर अद्रोहक ने फिर कहा इस सुन्दर नगर में बहुत से कामुक पुरुष हैं, अतएव किसी की स्त्री की रक्षा कैसे की जा सकती है ?॥१०६॥ राजकुमार ने पुन: कहा आप रक्षा करें मैं जा रहा हूँ सङ्कटापन्न गृहस्थ अद्रोहक ने राजकुमार से कहा अद्रोहक ने कहा--- मैं सदा अनुचित कार्य करता हुँ, अपनी दासता तो उचित और कल्याणमयी होती है इसतरह की पत्नी मेरे गृह में भी है ॥१०७-१०८॥ अश्क्ष्य वस्तु की रक्षा करने के लिए जो मैं कहता हूँ उसे करना होगा । जब मैं अपनी पत्नी के साथ सोऊँ तो यह मेरी ही शय्या पर सोये । यदि इसे आप मानें तब तो यह यहाँ रहे अन्यथा यह जाय । श्रीहरि ने कहा-- क्षणभर विचार करके राजकुमार ने कहा ॥१०९-११०॥ राजकुमार ने कहा-- तात ठीक है, आप जैसा चाहें वैसा ही करें श्रीहरि ने कहा-- उसके बाद अपनी पत्नी से राजकुमार ने कहा-- कल्याणि ! इनकी वातों का पालन करना, उसमें तुमको कोई पाप नहीं होगा । यह मेरी आज्ञा है । इस तरह से कहकर वह अपने पिता राजा की आज्ञा से बाहर चला गया।।११२॥ उसके बाद रात्रि में अद्रोहक ने जैसा कहा था वैसा ही किया; वह धार्मिक उन दोनों स्त्रियों के बीच में
No translation available yet.
Spotted a mistake or have a question? Sign in to let us know