Srishti Khanda Extracted Page 669

Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-669

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Sanskrit Original

ऋषय ऊचुः इत्युक्तः प्रययौ पक्षी भक्षयामास तांस्ततः । अलक्ष्यभावो विप्रोऽपि गिलितस्तेन पक्षिणा ॥५२॥ स तस्य बडी गाढं लालगीति द्विजस्तदा । वमितुंगलितुं चापि न शशाक द्विजोत्तमः॥५३॥ गत्वाऽथ पितरं प्राह किमेतदिति मे पितः। लग्नं मे गलके सत्वं प्रतिकर्तु न शक्रुयाम्॥५४॥ ऋषय ऊचुः तस्य तद्वचनं श्रुत्वा कश्यपस्तमुवाच ह । कश्यप उवाच मयोक्तं ते पुरा वत्स ब्राह्मणोऽयं न बुध्यसे ॥५५॥ ऋषय ऊचुः इत्युक्त्वा च मुनिर्धीमान् द्विजं प्राह स धार्मिकः । कश्यप उवाच आगच्छ त्वं ममासन्नं हितं ते प्रवदाम्यहम् ॥५६॥ | ऋषय ऊचुः तमुवाच तदा विप्रः कश्यपं मुनिपुंगवम् । विप्र उवाच ममैते सुहृदोनित्यं सर्वे संबंधिनः प्रियाः ॥५७॥ श्वशुराः स्यालकाश्चाप्तास्सबालाश्च तथापरे। एतैः सह प्रयास्यामि निरयं चापि वा शिवम्॥५८॥ ऋषय ऊचुः तस्य तद्वचनं श्रुत्वा विस्मितः कश्यपोऽब्रवीत्। कश्यप उवाच द्विजानां च कुलेजातश्चांडालैः पतितो भवान् ॥५९॥ रहकर खाना । केवल निषादों को ही खाना किसी ब्राह्मण को मत खा जाना ॥५१॥ ऋषियों ने कहा-- इस तरह से कहने पर वह पक्षी वहाँ चला गया तथा उन सबों को खा लिया । किन्तु नही पहचान पाने के कारण गरुड ने एक ब्राह्मण को भी खा लिया ॥५२॥ वह ब्राह्मण गरुड के गले में फँस गया । उस ब्राह्मण को गरुड न तो निगल पाते थे और न वमन ही कर पाते थे ॥५३॥ इसके बाद गरुड अपने पिता के पास गये और अपने पिता से पूछे कि यह क्या हो गया है ? मेरे गले में कोई जीव अँटक गया है, उसको मैं तो निगल पाता हुँ और न तो वमन ही कर पाता हूँ ॥५४। ऋषियों ने कहा-- गरुड की उस वाणी को सुनकर महर्षि कश्यप ने कहा कश्यप महर्षि ने कहा-- वत्स ! मैंने तुमसे पहले की कहा था, किन्तु तुम जान नहीं सके, यह ब्राह्मण है ॥५५॥ ऋषियों ने कहा--- इसतरह से कहकर बुद्धिमान मुनि ने उस ब्राह्मण से कहा कश्यप महर्षि ने कहा-- तुम मेरे पास आओ, मं तुम्हारे कल्याण की बातें बतलाता हूँ ॥५६। ऋषियों ने कहा--- उस समय उस ब्राह्मण ने महर्षि कश्यप से कहा उस ब्राह्मण ने कहा- ये मेरे मित्र हैं तथा मेरे प्रिय सम्बन्धी हैं ॥५७॥ इनमें से कोइ मेरा श्वशुर है तो कोई मेरा साला है । इन सबों के साथ मैं अकल्याणकारी नरकों में भी जाऊंगा ॥५८॥ ऋषियों ने कहा-- उसकी उस वाणी को सुनकर आश्चर्यित होकर कश्यप बोले । महर्षि कश्यप ने कहा-- तुम ब्राह्मणों के वंश में उत्पन्न होकर इन .__

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