Srishti Khanda Extracted Page 523
Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-523
Sanskrit Original
डड श्रीपद्ममहापुराण पुलस्त्य उवाच एवन्ते भीष्म रामस्य कथायोगेन पार्थिव । उत्पत्तिर्वामनस्योक्ता किं भूयः श्रोतुमिच्छसि ॥१९३॥कथयामि तु तत्सर्वं यत्र कौतूहलं नृप । सर्व॑ तेकीर्त्तयिष्यामि येनार्थी नृपनंदन ॥१९४॥ इति श्रीपडामहापुराणे प्रथमे सृष्टिखंडे वामनप्रतिष्ठानामाष्टत्रिशोऽध्याय: ॥३८॥ —— Ae उनतालिसवाँ अध्याय भीष्म उवाच कथितं वामनस्यैव माहात्म्यं विस्तरेण वै। पुनस्तस्यैव माहात्म्यमन्यद्विष्णोरतो वद॥९॥ पड़ां कथमभूद्देव नाभौ येनाभवज्जगत् । कथं च वैष्णवी सृष्टि: पद्ममध्ये भवत् पुरा॥२॥ कथं पाद्ये महाकल्पेऽ भवत्पद्ममयं जगत् । जलार्णवगतस्येह नाभौ जातं जलानुगम्॥३॥ प्रभावं पद्मनाभस्य स्वपतः सागरांभसि। पुष्करे तु कथं जाता देवा ऋषिगणाः पुरा ॥४॥ एतदाख्याहि निखिलं योगं योगविदां पते । कथं निर्मितवांस्तत्र चैतं लोकं सनातनम् ॥५॥ कथमेकार्णवे शून्ये नष्टे स्थावरजंगमे । भूगोलके प्रदग्धेतु प्रणष्टोरगराक्षसे ॥६॥ नष्टानलानिलाकाशे नष्टधर्मे महीतले । केवले गह्वरीभूते महाभूतविपर्यये ॥७॥ रामकथा के प्रसङ्ग में मेने तुम्हें वामनोत्पत्ति की कथा बतलायी अब क्या सुनना चाहते हो ?॥१९३॥ हे राजन् ! आपको जिस विषय में उत्कण्ठा हो उसे में बतलाऊंगा ॥१९४॥ इस तरह श्रीपद्ममहापुराण के प्रथम सृष्टिखण्ड का वामनप्रतिष्ठावर्णन नामक अड़तीसवें अध्याय का शिवप्रसाद द्विवेदी (श्रीधराचार्य) कृत हिन्दी अनुवाद सम्पूर्ण हुआ ।। ३८।। ke भीष्म का भगवान् विष्णु की नाभि से कमल की उत्पत्ति विषयक प्रश्न, पुलस्त्य महर्षि द्वारा सृष्टि वर्णन के प्रसङ्ग में युगों तथा युग सन्धि आदि का एवं युगधर्म का वर्णन, भगवान् के मुख में प्रविष्ट मर्कण्डेय महर्षि द्वारा भगवान् के उदर में प्रपंच का दर्शन, परमेश्वर से पद्म की उत्पत्ति भीष्मजी ने कहा-- आपने मुझे भगवान् वामन के माहात्म्य को विस्तार से बतलाया अतएव आप भगवान् विष्णु के ही माहात्म्य को विस्तार से बतलायें ॥१॥ भगवान् विष्णु की नाभि में पद्म कैसे उत्पन्न हुआ ? और उस कमल से जगत् की उत्पत्ति कैसे हुयी और पाद्मकल्प में वैष्णवी सृष्टि कैसे हुयी ?॥२॥ पद्म नामक कल्प में जगत् पद्ममय कैसे हो गया । जल सागर में विद्यमान भगवान् की नाभि में जलज कैसे उत्पन्न हुआ ?॥।३॥ सागर में शयनकरने वाले पद्मनाभ की महिमा को आप बतलायें । पुष्कर (कमल) पर ही देवताओं और ऋषियों की उत्पत्ति कैसे हुयी 2॥४॥ हे योगियों में अग्रगण्य इस योग से संबद्ध सारी बातों को आप बतलायें । उसमें इस सनातन लोक की सृष्टि कैसे हुयी ॥५॥ जब स्थावर एवं जङ्गम सभी जीव नष्ट हो गये थे, सम्पूर्ण भूमण्डल दग्ध हो चुका था, सर्प तथा राक्षस भी जब विनष्ट हो गये थे, उस शून्य एकार्णव वन में ॥६।। जब अग्नि, वायु तथा आकाश विनष्ट हो
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