Srishti Khanda Extracted Page 455
Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-455
Sanskrit Original
यासां वा श्रद्धधासि त्वं पृच्छ देवि नमोस्तुते । आशीर्वादस्तया दत्तो देवदेवस्य शूलिन: ॥५५॥ सावित्र्युवाच शरीरार्धे च ते गौरी सदा स्थास्यति शङ्कर । अनया शोभसे देव त्वन्तु त्रैलोक्यसुंदर ॥५६॥ पुलस्त्य उवाच सुखभागिजगत्ससर्व त्वया नाथेन शत्रुहन् । एवं ब्रुवंती सावित्री गृहीता ब्रह्मणः प्रिया ॥५७॥ गौर्य्या च वामहस्ते तु लक्ष्म्या वै दक्षिणे करे । अभिवंद्य तु तां देवीं शङ्करो वाक्यमब्रवीत्॥५८॥ शिव उवाच एह्यागच्छमहाभागे यत्र तिष्ठति ते पतिः । तत्र गच्छ वरारोहे स्त्रीणां भर्ता परा गतिः ॥५९॥ बृहदाग्रहेण देवि प्रणयाद्गंतुमर्हसि । लक्ष्मीश्चैषा पार्वती च स्थिता देवि तवाग्रतः ॥६०॥ एतयोर्वचसा देवि आवयोश्च शुभानने। मानभंगो न ते कर्तु युज्यते ब्रह्मणः प्रिये॥६ ९॥ अस्मदभ्यर्थिता देवि तत्र याहि मुदान्विता। गोर्युवाच अहं च ते प्रिया देवि सर्वदा वदसि स्वयम् ॥६२॥ लक्ष्मीश्च ते करे लग्ना दक्षिणे च मया धृता। एह्यागच्छ महाभागे यत्र तिष्ठति ते पतिः॥६३॥ पुलस्त्य उवाच नीता सा तु तदा ताभ्यां देवी सा मध्यतः कृता । पुरस्सरौ विष्णुरुद्रौ शक्राद्याश्च तथा सुराः ॥६४॥ गंधर्वाप्सरसश्चैव त्रैलोक्यं सचराचम् । तत्रायाता च सा देवी सावित्री ब्रह्मणः प्रिया ॥६५॥ सावित्री सुमुखीं दृष्ट्वा सर्वलोकपितामहः । गायत्र्या सहितो ब्रह्मा इदं वचनमब्रवीत् ॥६६॥ ब्रह्मोवाच एषा देवी कर्मकरी अहं ते वशगःस्थितः । समादिश वरारोहे यत्ते कार्य मया त्विह ॥६७॥ सबों पर आपकी श्रद्धा हैउन सबों से आप पूछ सकती हैं । आपको नमस्कार है । सावत्री ने शङ्करजी को आशीर्वाद दिया ॥५५॥ हे शङ्कर ! आपके शरीयार्द्ध रूप से गौरी सदा बनी रहेंगी । हे त्रैलोक्य सुन्दर आप इसके साथ सुन्दर लगते हैं ॥५६॥ हे शत्रुहन् ! आप जैसे स्वामी को प्राप्त करके संसार सुखी हो गया है । जिस समय सावित्री देवी इस तरह से कह रही थीं उस समय गौरी देवी ने सावित्री देवी के बायें हाथ को पकड़ लिया और लक्ष्मी दाहिने हाथ को पकड़ी थीं । सावित्री देवी को प्रणाम करके शङ्करजी ने कहा ॥५७-५८॥ हे महाभागे ! आप आइये और जहाँ आपके पति ब्रह्माजी हैं वहाँ चलिए । स्री के लिए उसका सबसे बड़ा आश्रय पति ही होता है ॥५९॥ हे देवि ! बहुत अधिक आग्रह होने के कारण आपको चलना ही चाहिए । लक्ष्मी और पार्वती ये दोनों आपके सामने खड़ी हैं ॥६०॥ इन दोनों के तथा हम दोनों के कहने के कारण आपको हम सबों का अनादर करना ठीक नहीं है ॥६१॥ हे देवि! हमलोगों की प्रार्थना को सुनकर आप प्रसन्नता पूर्वक वहाँ चलें । गौरी ने कहा-- हे देवि ! आप हमेशा कहती हैं कि मैं आपकी प्रिय सखी हूँ । में आपको पकड़े हुयी हूँ और लक्ष्मीजी भी आपकी दाहिनी ओर हैं । अतएव हे महाभागे ! आओ, और वहाँ चलो जहाँ तुम्हारे पतिदेव हैं ॥६३॥ इसके बाद पार्वती और लक्ष्मी दोनों सावित्री देवी को अपने बीच में करके लायीं । उनके आगे विष्णु रुद्र तथा इन्द्र आदि देवता तथा असुर ॥६४॥ गन्धर्व, अप्सराएँ तथा चराचरात्मक त्रैलोक्य चल रहा था । ब्रह्माजी की पत्नी सावित्री देवी वहाँ आयीं ।६५॥ सावित्री देवी को प्रसन्न
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