Srishti Khanda Extracted Page 396

Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-396

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Sanskrit Original

नमोस्तु पाटलायै तु पादौ दिव्याः शिवस्य च । शिवायेति च संकीर्त्य जयायै गुल्फयो ईयोः ॥९९॥ तर्यंबकायेति रुद्रस्य भवान्यै जंघयो र्युगम् । शिरो रुद्रेश्वरायेति विजयायै च जानुनी॥२०॥ संकीर्त्य हरिकेशाय तथोरुवरदे नमः। ईशायेति कटिं रत्यै शङ्करायेति शङ्करम् ॥२१॥ कुक्षिद्वयं च कोटव्यै शूलिनं शूलपाणये । मङ्गलायै नमस्तुभ्यमुदरं चाभिपूजयेत् ॥२२॥ सर्वात्मने नमो रुद्रमीशान्यै च कुचद्वयम् । शिवं वेदात्मने तद्दद्रुद्राण्ये कंठमर्चयेत्॥२३॥ त्रिपुरघ्नाय विश्वेशमनंतायै करद्वयम् । त्रिलोचनायेति हरं बाहू कालानलप्रिये॥२४॥ सौभाग्यभवनायेति भूषणानि सदार्चयेत् । स्वाहा स्वधायै च मुखमीश्वरायेति शूलिनम् ॥२५॥ अशोकवनवासिन्यै पूज्यावोष्ठौ च भूतिदौ। स्थाणवे च हरं तद्वदास्यं चंद्रमुखप्रिये ॥२६॥ नमोर्धनारीशहरमसितांगीति नासिकाम् । नम॒ उग्राय लोकेशं ललितेति पुनर्श्चुवौ ॥२७॥ शर्वाय पुरहर्तारं वासुदेव्यै तथालकम् । नमः श्रीकंठनाथाय शिवकेशांस्तथार्चयेत् ॥२८॥ भीमोग्रभीमरूपिण्यैशिरः सर्वात्मने नमः । हरमभ्यर्च्य विधिवत्सौभाग्याष्टकमग्रतः ॥२९॥ स्थापयेत्स्निग्धनिष्पावान् कुसुंभक्षीरजीरकम् । तरुराजेक्षुलवणं कुस्तुबुरुमथाष्टमम्॥३ ०॥ दद्यात्सौभाग्यकृद्यस्मात् सौभाग्याष्टकमित्युत । एवं निवेद्य तत्सर्वमग्रतः शिवयोः पुनः ॥३९॥। चैत्रे श्रृंगाटकान्प्राशय स्वपेद्धूमावरिंदम । पुनः प्रभाते च तथा कृतस्नानजपः शुचिः ॥३२॥ संपूज्य द्विजदांपत्यं माल्यवस्त्रविभूषणैः । सौभाग्याष्टकसंयुक्तं सौवर्ण प्रतिमाद्वयम् ॥३३॥ नमः, शिवाय नमः इन दोनों मन्त्रों से शिव और पार्वती दोनों के चरणों की पूजा करे । जयायै नमः शिवाय नमः से दोनों की घुट्टियों की पूजा करे ॥१९॥ त्र्यम्बकाय नमः भवान्यै नमः से दोनों की जड्डों की पूजा करे । रुद्रेधराय नमः तथा विजयायै नमः से घुटनों की पूजा करे ॥२०॥ हरिकेशाय नमः वरदे नमः से दोनों के उरु भाग की पूजा करे । ईशाय नमः और शङ्कराय नमः, रत्यै नमः से दोनों के कटि प्रदेश की पूजा करे ॥२१॥ कोटव्यै नमः, शूलिने नमः से दोनों की कुक्षि की पूजा करे । शूलपाणये नमः, मङ्गलायै नमः से उदर की पूजा करे ॥२२॥ सर्वात्मने नमः, ईशान्यै नमः से दोनों के स्तनों की पूजा करे । वेदात्मने नमः, रुद्राण्यै नम: से दोनों के कण्ठ की अर्चना करे ॥२३॥ त्रिपुरघ्नाय नमः अनन्तायै नमः से दोनों के दोनों हाथों की अर्चना करे । त्रिलोचनाय नमः कालानलप्रियायै नमः से दोनों की भुजाओं की पूजा करे ॥२४।॥ सौभाग्यभवनाय नमः से आभूषणों की पूजा करे । स्वाहायै नमः स्वधायै नमः ईश्वराय नमः से मुख की पूजा करे ॥२५॥ अशोकवन बासिन्यै नमः से ऐश्वर्य प्रदान करने वाले ओष्ठों की पूजा करे । स्थाणवे नमः, चन्द्रमुखप्रियायै नमः से दोनों के मुख का पूजन करे ॥२६॥ अर्द्धनारीश्वराय नमः, असिताङ्गचै नमः से नासिका की पूजा करे । उग्राय नमः ललितायै नमः से दोनों के भौहों की पूजा करे ॥२७॥ शर्वाय नमः वासुदेव्यै नमः से दोनों के केशों की पूजा करे। श्रीकण्ठाय नमः से केवल शिव के केश का पूजन करे ॥२८॥ भीमोग्ररूपिण्यै नमः सर्वात्मने नमः से दोनों के मस्तक का पूजन करे । इस तरह सविधि पूजा करके उन दोनों मूर्तियों के समक्ष सौभाग्य अष्टक को स्थापित करे।२९॥ निष्पावा, कुसुम्भ, क्षीरजीरक, तरुराज, ईख, नमक, कुसुम तथा राजधान्य ये आठो सौभाग्य अष्टक हैं॥३०॥ इन सबों को सौभाग्याष्टक इसलिए कहते हैं कि इन सबों का दान करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है । इन सबों को शिव तथा शिवा को निवेदित करके फिर उन दोनों की सुवर्ण प्रतिमा को ब्राह्मण दम्पती को प्रदान कर दे ॥३१॥ रात्रि में शृङ्गाटक (सिंघाड़ा) खाकर भूमि पर सो जाय । प्रात:काल स्नान करके तथा जप करके पवित्र

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