Srishti Khanda Extracted Page 385

Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-385

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Sanskrit Original

शूद्रोपि परया भक्त्या पाषंडालापवर्जित: । सोमाय वरदायाथ विष्णवे च नमो नमः ॥६॥ कृतजप्यः स्वभवनमागत्य मधुसूदनम् । पूजयेत्फलपुष्पैश्च सोमनामानि कीर्तयन्॥७॥ सोमाय शांताय नमोस्तु पादाव नंतधाम्नेति च जातुजङ्घे । ऊरुद्दयं चापि जलोदराय संपूजयेन्मेढूमनंगाधाम्मे ॥८॥ नमो नमः कामसुखप्रदाय कटिः शशांकस्य सदार्चनीयः । तथोदरं चाप्यमृतोदराय नाभिः शशांकाय नमोभिपूज्या ॥९॥ नमोस्तु चंद्राय मुखं च नित्यं दंता द्विजानामधिपाय पूज्याः । हास्यं नमश्च॑द्रमसेऽभिपूज्य मोष्ठौ तु कौमोदवनप्रियाय ॥१०॥ नासा च नाथाय वरौषधीना मानंदबीजाय पुनर््ुवौ च । नेत्रद्वयं पद्निभं तथेंदो रिंदीवरव्यासकराय शौरेः ॥९९॥ नमः समस्ताध्वरपूजिताय कर्णद्वयं दैत्यनिषूदनाय। ललाटमिंदोरुदधिप्रियाय केशाः सुषुम्नाधिपतेः प्रपूज्याः ॥९२॥ शिरः शशांकाय नमो मुरारे विश्वेश्वरायाथ नमः किरीटम् । पद्मप्रिये रोहणी नाम लक्ष्मि सौभाग्यसौख्यामृतसागराय ॥९३॥ दैवीं च संपूज्य सुगंधिपुष्पै नैविद्यपद्यादिभिरिंदुपत्नीम् । सुप्त्वातु भूमौ पुनरुत्थितो यः स्नात्वाच विप्राय हविष्यभुक्तः ॥९४॥ उस ब्रत को पराभक्ति से युक्त शूद्र भी कर सकता है । व्रती को पाखण्डी से बात-चित नहीं करना चाहिए । उसके बाद सोमाय वरदाय विष्णवे च नमो नमः अर्थात् वरदान प्रदान करने वालो सोम स्वरूप भगवान् विष्णु को बारम्बार नमस्कार है । इस मन्त्र का जप करके व्रती अपने घर आये और चन्द्रमा के नामों का उच्चारण करके भगवान् मधुसूदन की पूजा फलों तथा पुष्पों से करे ॥७॥ सोमाय शान्ताय नमः इस मन्त्र से श्रीभगवान् के दोनों घुटनों तथा दोनों जह्लों की पूजा करे । जलोदराय नमः इस मन्त्र से दोनों ऊरूभागों की पूजा करे । अनङ्गधाम्ने नमः इस मन्त्र से भगवान के मेढ़ (अण्डकोषों) की पूजा करे ॥८॥ कामसुखप्रदाय नमः इस मन्त्र से चन्द्रमा के कटि प्रदेश की पूजा करे, अमृतोदराय नमः इस मंत्र से उदर की पूजा करे शशांकाय नमः इस मन्त्र से नाभि की पूजा करे ॥९॥ चन्द्राय नमः से श्रीभगवान् के मुख की पूजा करे द्विजानामधिपाय नमः इस मन्त्र से दांतों की पूजा करे । चन्द्रमसे नमः इस मन्त्र से हास्य की पूजा करके कौमोदवनप्रियाय नमः इस मन्त्र से दोनों ओष्ठों की पूजा करे ॥१०॥ औषधिनाथाय नमः से नाक की पूजा करे, आनन्दबीजाय नमः इससे दोनों भौहों की पूजा करे । इन्दीवरायासकराय नमः इस मन्त्र से चन्द्रमा के कमल सदृश दोनों नेत्रों की पूजा करके, ॥१२॥ समस्ता ध्वरपूजिताय नमः इस मन्त्र से श्रीभगवान् के दोनों नेत्रों की पूजा करे । दैत्यनिषूदनाय नमः इस मन्त्र से दोनों कानों की पूजा करे, उदधिप्रियाय नमः इस मन्त्र से चन्द्रमा के ललाट की पूजा करे और उसी मन्त्र से श्रीभगवान् "के भी ललाट की पूजा करे ॥१२॥ शशांकाय नमः इस मन्त्र से भगवान् के शिर की पूजा करे और विश्वेश्वराय नमः रोहिणीनामधेय लक्ष्मी सौभाग्य सौख्यामृत सागराय पद्मश्रिये नमः (अर्थात् रोहिणी नामवाली लक्ष्मी के सौभाग्य तथा सौख्य रूपी अमृत के सागर स्वरूप तथा कमल जैसी कान्ति वाले भगवान् को नमस्कार है ।) इस मत्र से श्रीभगवान् के समक्ष प्रणाम करे ॥१३॥ उसके पश्चात् चन्द्रमा की पत्नी रोहिणी देवी की भी सुगन्धित पुष्पों,

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