Srishti Khanda Extracted Page 347

Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-347

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Sanskrit Original

अहोरात्रे गते पश्चादष्टम्यां भोजयेदिद्दजान् । यथाशक्ति च भुंजीत विमांसं तैलवर्जितम् ॥२८३॥ अनेन विधिना शुक्लसप्तम्यां मासि मासि च । सर्व समाचरेद्धक्त्या वित्तशाठ्यविवर्जित: ॥२८४॥ ब्रतांते शयनं दद्यात्सुवर्णकमलान्वितम् ॥२८५॥ गाश्च प्रदद्याच्छक्त्या तु सुवर्णस्य पयस्विनीः । भाजनासनदीपादीन् दद्यादिष्टानुपस्कारान् ॥२८६॥ अनेन विधिना यस्तु कुर्यात्कमलसध्तमीम् । लक्ष्मीमनंतामभ्येति सूर्यलोके च मोदते ॥२८७॥ कल्पे कल्पे ततो लोकान् सप्त गत्वा पृथक् पृथक् । अप्सरोभिः परिवृतस्ततो याति परां गतिम् ॥२८८॥ पश्येदिमां यः श्ृणुयान्मुहूर्ते पठेच्चभक्त्याथ मतिं ददाति । सोप्यत्रलक्ष्मीममलामवाप्य गंधर्वविद्याधरलोकमेति ॥२८९॥ अतः परं प्रवक्ष्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम्। सर्वकामप्रदां पुण्यां नाम्ना मंदारसप्तमीम् ॥२९०॥ माघस्यामलपक्षे तु पंचम्यां लघु भुङ्नरः । दंतकाष्ठं ततः कृत्वा षष्ठीमुपवसेद्दधः ॥२९१॥ विप्रान्संपूजयित्वा तु मंदारं प्रार्थयेन्निशि । ततः प्रभात उत्थाय कृत्वा स्नानं पुनर्द्धिजान्ू ॥२९२॥ भोजयेच्छक्तितः कुर्यान्मंदारकुसुमाष्टकं । सौवर्ण पुरुषं तद्दत्पद्महस्तं सुशोभनम्॥२९३॥ पदां कृष्णतिलैः कृत्वा ताम्रपात्रेष्टपत्रकम्। हेममंदारकुसुमै भास्करायोति पूर्वतः ॥२९४॥ नमस्कारेण तद्दच्च सूययेत्यमलेदले । दक्षिणे तद्ददर्काय तथार्यम्णे च नैत्रऋते॥२९५॥ विधिपूर्वक कपिला गौ का दान दे ॥२८१-२८२॥ दिन तथा रात बीत जाने पर व्रती को चाहिये की वह अष्टमी तिथि में अपनी शक्ति के अनुसार ब्राह्मणों को भोजन कराये । उसके बाद स्वयं मांस तथा तेल रहित भोजन करे॥२८३॥ इसी प्रकार से प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को उदारता पूर्वक इस ब्रत को करे, कंजूसी न करे ॥२८४॥ जब व्रत की समाप्ति हो जाय तो सुवर्ण निर्मित कमल के साथ शय्या दान करे ॥२८५॥ यदि शक्ति हो तो सुवर्णालङ्कृत दूध देने वाली गायों का दान करे । उसके साथ उसके लिए आवश्यक सामग्री दोहन पात्र, आसन, दीपक आदि भी दान में दे ॥२८६॥ इसी विधि से जो कमल सप्तमी का व्रत करता है, वह अनन्त लक्ष्मी को प्राप्त करता है तथा सूर्य लोक में जाकर आनन्दानुभव करता है ॥२८७॥ वह एक-एक कल्प तक सातो लोकों में जाकर अप्सराओं के साथ निवास करता है और उसके पश्चात् मुक्ति को प्राप्त कर लेता है ॥२८८॥ इस कमल सप्तमी के व्रत का जो दर्शन करता है, अथवा उसका सुन्दर मुहूर्त में श्रवण करता हें, अथवा भक्ति पूर्वक पढता है, अथवा किसी को इसे करने की प्रेरणा देता है, वह भी इस लोक में निर्दोष लक्ष्मी को प्राप्त करके गन्धर्वो तथा विद्याधरों के लोक में जाता है ॥२८९॥ इसके बाद मैं उस मंदार सप्तमी का वर्णन करूँगा जो सभी पापों को विनष्ट करने वाली, सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाली तथा अत्यन्त पवित्र है ॥२९०॥। मनुष्य को चाहिए कि वह माघ मास के शुक्ल पक्ष की पञ्चमी तिथि को अल्पाहार करे । उसके बाद दतौन करके षष्ठी तिथि को उपवास करे।। २९ १॥ रात्रि में ब्राह्मणों की पूजा करके मन्दार की प्रार्थना करे । उसके बाद प्रातःकाल जगकर फिर ब्राह्मणों को॥२९२॥ अपनी शक्ति के अनुसार भोजन कराये उसके पश्चात् सुवर्ण के द्वारा आठ मन्दार (पारिजात) पुष्पों का निर्माण कराये । उसके पश्चात् हाथ में कमल लिए सुन्दर पुरुष का सुवर्ण से निर्माण कराये ॥२९३॥ ताम्बे के पात्र में तिलों के द्वारा अष्टदल कमल का निर्माण करे । उसके पूर्व वाले दल पर सुवर्ण निर्मित मन्दार कुसुम में भास्कराय नमः इस मन्त्र से पूजा करे ॥२९४॥ फिर दक्षिण दल में सूर्याय नमः इस मन्त्र से सुवर्ण मन्दार पुष्प

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