Srishti Khanda Extracted Page 241
Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-241
Sanskrit Original
ह श्रीपद्ममहापुराण चित्रे ब्रह्मकला नाम शक्तिः सर्वशरीरिणाम् । एतद्धक्त्या मया प्रोक्तं नामाष्टशतमुतमम्॥२९१॥ अष्टोत्तरंच तीर्थानां जशतमेतदुदाहतं। योजपेच्छुणुयाद्वापि सर्वपापैः प्रमुच्यते ॥२१२॥ येषु तीर्थेषु यः कृत्वा स्नानं पश्येन्नरोत्तमः। सर्वपापविनिर्मुक्तः कल्पं ब्रह्मपुरे वसेत्॥२१३॥ नामाष्टकशतं यस्तु ् आवयेद्दह्मसन्निधौ । पौर्णमास्याममायां वा बहुपुत्रोभवेन्नरः ॥२१४॥ गोदाने श्राद्ददाने वा अहन्यहनि वा पुनः । देवार्चनविधौ शृण्वन्परंब्रह्माधिगच्छति ॥२१५॥ एवं स्तुवंतं सावित्री विष्णुं प्रोवाच सुव्रता । सम्यकस्तुता त्वया पुत्र त्वमजय्यो भविष्यसि ॥२१६॥ अवतारे सदारस्त्वं पितृमातृषु वल्लभः । इह चागत्य यो मां तु स्तवेनानेन संस्तुयात् ॥२१७॥ सर्वपापविनिर्मुक्तः परं स्थानं गमिष्यति। गच्छ यज्ञं विरिञ्जस्य समाप्ति नय पुत्रक ॥२१८॥ कुरुक्षेत्रे प्रयागे च भविष्ये चान्नदायिनी । समीपगा स्थिता भर्त्तः करिष्ये तव भाषितम् ॥२१९॥ एवमुक्तो गतो विष्णुब्रह्मण: सद उत्तमम्। गतायामथ सावित्र्यां गायत्री वाक्यमब्रवीत्॥२२०॥ शृण्वंतु वाक्यमृषयो मदीयं भर्तृसन्निधौ। यदिदं वच्म्यहं तुष्टा वरदानाय चोद्यता ॥२२९॥ ब्रह्माणं पूजियिप्यंति नरा भक्तिसमन्विताः । तेषां वस्त्रं धनं धान्यं दाराः सौख्यं धनानि च॥२२२॥ अविच्छिन्नं तथा सौख्यं गृहे वै पुत्रपौत्रकम् । भुक्त्वासौ सुचिरं कालमंते मोक्षं गमिष्यति ॥२२३॥ पुलस्त्य उवाच ब्रह्माणं च प्रतिष्ठाप्य सर्वयत्नो विधानतः । यत्पुण्यफलमाप्रोति तदेकाग्रमनाः शृणु ॥२२४॥ सूर्य मण्डल में आप प्रभा देवी होंगी, मातृकाओं में आप वैष्णवी देवी होंगी, सतियों में आप अरुन्धती देवी हे और सुन्दरियों में आप तिलोत्तमा हैं ॥२१०॥ चित्रों में आप ब्रह्माला हैं और शरीर धारियों में आप शक्ति स्वरूपिणी हैं। मैंने भक्ति पूर्वक आपके अष्टोत्तरशत नाम को कहा है ॥२११॥ यह मैं आपके अष्टोतर शत तीर्थो को कहा है । जो व्यक्ति आपके इन नामों को पढेगा अथवा सुनेगा वह सभी पापों से मुक्त हो जायेगा ॥२१२॥ जो मनुष्य श्रेष्ठ जिस तीर्थ में जाकर स्नान करके आपका दर्शन करेगा, वह सभी पापों से मुक्त होकर एक कल्प पर्यन्त, ब्रह्मालोक में निवास करेगा ॥२१३॥ जो मनुष्य आपके इन अष्टोत्तरशत नामों को पूणिमा अथवा अमावस्या के दिन सुनायेगा, वह अनेक पुत्रों वाला होगा ॥२१४॥ गोदान के समय अथवा श्राद्ध करते समय या प्रतिदिन या देवपूजन के समय जो आपके नामों का श्रवण करेगा वह परंबह्म को प्राप्त कर लेगा ॥२१५॥ इस प्रकार से स्तुति करने वाले भगवान् विष्णु से सावित्री देवी ने कहा हे पुत्र ! तुमने मेरी अच्छी तरह से स्तुति की है; अतएव तुम अजेय होओगे ॥२१६॥ अवतारों के समय तुम अपनी पत्नी के साथ अपने माता-पिता के प्रिय होओगे । यहाँ पर आकर जो व्यक्ति इस स्तुति के द्वारा मेरी स्तुति करेगा ॥२१७॥ वह सभी पापों से मुक्त होकर परम्पद (मुक्ति) को प्राप्त करेगा । हे पुत्र ! तुम . ब्रह्माजी के यज्ञ में जाओ और उसे पूरा करो ॥२१८॥ मैं प्रयाग तथा कुरुक्षेत्र में अन्नदायिनी होऊँगी और अपने पति के सन्निकट रहकर मैं तुम्हारी वाणी को सत्य करूँगी ॥२१९॥ इसतरह से कहने पर भगवान् विष्णु ब्रह्माजी की उत्तम सभा में गये । इसके बाद सावित्री के चले जाने पर गायत्री ने कहा ॥२२०॥ हे ऋषियों आपलोग मेरी बात को सुनें । मैं अपने पति के सन्निकट में आपलोगों को वरदान देना चाहती हूँ ॥|२२१॥ जो मनुष्य ब्रह्माजी की पूजा भक्ति पूर्वक करेंगे । उन लोगों के गृह में वस्र, धन, धान्य (अन्न) पत्नियाँ, सुख तथा अनेक प्रकार के धन ॥२२२॥ तथा निरन्तर सुख तथा पुत्र एवं पौत्र सदा बने रहेंगे । वह मनुष्य इस लोक में दीर्ध काल तक इन सबों का भोग करके अन्त में मोक्ष प्राप्त कर लेगा ॥२२३॥ पुलस्त्य महर्षि नेकहा-- ब्रह्माजी की प्रतिष्ठा विधिपूर्वक करने से जिस
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