Srishti Khanda Extracted Page 239
Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-239
Sanskrit Original
क्र“ २१४ श्रीपद्ममहापुराण मदोत्कटा चैत्ररथे जयंती हस्तिनापुरे । कान्यकुब्जे तथा गौरी रंभामलयपर्वते ॥१८६॥ एकाम्रके कीर्तिमती विश्वा विश्वेश्वरी तथा । कर्णिके पुरुहासेति केदारे मार्गदायिका ॥१८७॥ नंदा हिमवतः पृष्टे गोकर्णे भद्रकालिका। स्थाण्वीश्वरे भवानीतु बिल्वके बिल्वपत्रिका ॥१८८॥ श्रीशैले माधवी देवी भद्रा भद्रेश्वरी तथा । जया वराहशैले तु कमला कमलालये ॥१८९॥ रुद्रकोट्यां तु रुद्राणी काली कालंजरे तथा। महालिंगे तु कपिला काकॉटे मंगलेश्वरी ॥१९०॥ शालिग्रामे महादेवी शिवलिंगे जलप्रिया । मायापुर्यां कुमारी तु संताने ललिता तथा॥१९१॥ उत्पलाक्षी सहस्राक्षे हिरण्याक्षे महोत्पला। गयायां मङ्गला नाम विमला पुरुषोत्तमे ॥१९२॥ विपाशायाममोघाक्षी पाटला पुण्यवरद्धने। नारायणी सुपार्श्वे तु त्रिकूटे भद्रसुंदरी॥१९३॥ विपुले विपुला नाम कल्याणी मलयाचले । कोटवी कोटितीर्थे तु सुगंधा माधवी वने॥१९४॥ कुब्जाम्रके त्रिसंध्या तु गंगाद्वारे हरिप्रिया । शिवकुंडे शिवानंदा नंदिनी देविकातटे ॥१९५॥ रुक्मिणी द्वारवत्यां तु राधा वृंदावने तथा । देवकी मथुरायां तु पाताले परमेश्वरी ॥१९६॥ चित्रकूटे तथा सीता विंध्ये विंध्यनिवासिनी । सह्याद्रावेकवीरा तु हरिश्चंद्र तु चंद्रिका ॥९९७॥ उपासना कामचारिणी देवी के नाम से होगी ॥१८५॥ चैत्ररथ वन में आपकी उपासना मदोत्कटा नाम से तथा हस्तिनापुर में जयन्ती के नाम से आपकी उपासना होगी । कान्यकुब्ज में, आपकी उपासना गौरी देवी के नाम से तथा मलय पर्वत पर आप रम्भा देवी के नाम से पूजी जायेंगी ॥१८६॥ एकाभ्र तीर्थ में आपकी पूजा कीर्तिमती देवी विश्वादेवी तथा विश्वेवरी के नाम से होगी । कर्णिका तीर्थ में पुरुहस्ता के नाम से तथा केदार तीर्थ में मार्गदायिका के ` नाम से आपकी आराधना होगी ॥१८७॥ हिमालय पर्वत पर नन्दा देवी के रूप में तथा गोकर्ण तीर्थ में भद्रकाली के रूप में आपकी आराधना होगी । स्थाण्वीश्वर तीर्थ में भवानी के नाम से तथा बिल्व तीर्थ में विल्वपत्रिका नाम से आपकी आराधना होगी ॥१८८॥ श्रीशैल पर माधवी देवी, भद्रा देवी तथा भद्रेश्वरी के नाम से आप पूजी जायेंगी वराहशैल पर जया देवी के नाम से तथा कमलालय में कमला देवी के रूप में आप पूजी जायेंगी ॥१८९॥ रुद्र कोटी तीर्थ में रुद्राणी के नाम से तथा कालंजर पर्वत पर काली नाम से आपकी पूजा होगी । महालिङ्गः तीर्थ में कपिला देवी के नाम से तथा ककोर्टक तीर्थ में मङ्गलेश्वरी देवी के नाम से आपकी पूजा होगी ।।१९०॥। शालिग्राम क्षेत्र में महादेवी के नाम से तथा शिवलिङ्ग तीर्थ में आप जलप्रिया होंगी । मायापुरी में कुमारी के नाम से तथा संतान तीर्थ में ललिता देवी के नाम से आप पूजी जायेंगी ॥१९१॥ सहस्राक्ष तीर्थ में कमलाक्षी के नाम से तथा हिरण्याक्ष क्षेत्र में महोत्पला नाम से आप पूजी जायेंगी । आपका गया मे नाम मङ्गला देवी तथा पुरुषोत्तम तीर्थ में विमला देवी होगा ॥१९ २॥ विपाशा में आप अमोघाक्षी देवी और पुण्यवर्धन क्षेत्र में आप पाटला देवी होंगी । सुपार्श्व तीर्थ में नारायणी देवी तथा त्रिकूट पर्वत पर आपका नाम भद्रसुन्दरी होगा ॥१९३॥ विपुलतीर्थ में आपका नाम विपुलादेवी होगा और मलयाचल पर आप कल्याणी देवी के नाम से पूजी जायेंगी । कोटि तीर्थ में कोटवी देवी तथा माधवी वन में आपका नाम सुगन्धा देवी होगा ॥१९४॥ कुब्जा नामक तीर्थ में आपका नाम हरिप्रिया होगा । शिवकुण्ड पर आप शिवानन्द होंगी तथा देविका नदी के तट पर आप नन्दिनी देवी होंगी ॥१९५॥ द्वारवती (द्वारका) में आप रुक्मिणी देवी तथा वृन्दावन में आप राधा देवी होंगी । मथुरा में आपका नाम देवकी देवी तथा पाताल में आपका नाम परमेश्वरी होगा ॥१९६॥ चित्रकूट में आपका नाम सौता देवी होगा । तथा विन्ध्यकषेत्र में आपका नाम विन्ध्यवासिनी होगा । सह्याचल पर आपका नाम एकवीरा देवी होगा । हसिश्वन्द्र तीर्थ में आप चन्द्रिका देवी होंगी ।। १९७॥। रामतीर्थ में आप रमा देवी
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