Srishti Khanda Extracted Page 233
Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-233
Sanskrit Original
: श्रीपद्ममहापुराण सावित्री गमने सर्वा आगता देवयोषितः । भृगोः ख्यात्यां समुत्पन्ना विष्णुपत्नी यशस्विनी॥१ ० १॥ आमन्त्रिता सदा लक्ष्मीस्तत्रायाता त्वरान्विता । मदिरा च महाभागा योगनिद्रा विभूतिदा ॥१०२॥ श्रीः कमलालया भूतिः कीर्तिः श्रद्धामनस्विनी। पुष्टितष्टिप्रदा या तु देव्या एताः समागताः ॥१०३॥ सती या दक्षतनया उमेतिपार्वती शुभा। त्रैलोक्य सुंदरी देवी स्त्रीणां सौभाग्यदायिनी ॥१०४॥ जया च विजया चैव मधुच्छंदामरावती । सुप्रिया जनकांता च सावित्र्या मंदिरे शुभे ॥१०५॥ गौर्या सह समायातास्सुवेषाभरणान्विताः । पुलोमदुहिता चैव शक्राणी च सहाप्सराः ॥१०६॥ स्वाहा चापि स्वधा याता धूम्रोर्णा च वरानना। यक्षी तु राक्षसी चैव गौरी चैव महाधना ॥१०७॥ मनोजवा वायुपत्मी ऋद्धिश्च धनदप्रिया। देवकन्यास्तथायाता दानव्यो दनुवल्लभाः ॥१ ० ८॥ सप्तर्षीणां महापत्न्य ऋषीणां च वरांगना: । एवं भगिन्यो दुहिता विद्याधरी गणास्तथा ॥१०९॥ राक्षस्यः पितृकन्याश्च तथान्या लोकमातरः । बधूभिः सस्नुषाभिश्च सावित्री गंतुमिच्छति॥११०॥ आदित्याद्यास्तथा सर्वा दक्षकन्यास्समागताः । ताभिः परिवृता साध्वी ब्रह्माणी कमलालया ॥१११॥ काचिन्मोदकमादाय काचिच्छूर्पवरानना। फलपूरितमादाय प्रयाता ब्रह्मणोंतिकम् ॥११२॥ आढकीः सहनिष्पावा गृहीत्वान्यास्तथापरा । दाडिमानि विचित्राणि मातुलिंगानि शोभना ॥११३॥ करीराणि तथा चान्या गृहीत्वा कमलानि च । कौसुंभकं जीरकं च खर्जूरमपरा तथा॥१२४॥ उत्तमान्यपरादाय नालिकेराणि सर्वशः। द्राक्षयापूरितं काचित्पात्रं शृंगाटकं तथा ॥११५॥ उसे बतलाता हूँ ॥१००॥ सावित्री के उस यज्ञ में पधारने के समय सभी देवताओं की स्त्रियाँ आ गयीं । ख्याति देवी के गर्भ से उत्पन्न, भृगु महर्षि की पुत्री, तथा भगवान् विष्णु की यशस्विनी पत्नी लक्ष्मीजी आमन्त्रित होकर वहाँ पर शीघ्रता पूर्वक आयीं । महाभागा मदिरा देवी, योगनिद्रा, ऐश्वर्य प्रदान करने वाली, कमलवन में निवास करने वाली श्रीदेवी, भूति, कीर्ति, मनस्विनी कीर्ति देवी तथा पुष्टि एवं तुष्टि प्रदान करने वाली जितनी देवियाँ थी वे सब आयी ॥१०१-१०३॥ दक्ष प्रजापति की पुत्री सती देवी, मङ्गलप्रदा उमा, पार्वती देवी आयीं जो त्रैलोक्य सुन्दरी तथा स्त्रियों को सौभाग्य प्रदान करने वाली हैं ॥१०४॥ जया, विजया, मधुच्छन्दा, सरस्वती, सुप्रिया, जनकांता ये सबके सब सावित्री देवी के घर आयीं ॥१०५॥ ये सभी देवियाँ सुन्दर वेष में तथा आभूषणों से भूषित होकर आयीं । पुलोम की पुत्री तथा इन्द्र की पत्नी शची अप्सराओं के साथ आयीं ॥१०६॥ स्वाहा देवी, स्वधा देवी तथा सुन्दरी धूमोर्णा देवी । यक्षी तथा राक्षसी महाधनी कुबेर की पत्नी गौरी देवी आयीं ॥१०७॥ मन के समान वेग वाली वायु की पत्नी मनोजवा तथा कुबेर की प्रियतमा ऋद्धि देवी आयीं । देव कन्यायें आयी, दनु की प्रियतमाएँ दानवियाँ आयीं ॥१०८॥ सप्तर्षियों की पत्नियाँ तथा ऋषियों की पत्नियाँ आयीं, इसीतरह सावित्री की पुत्रियाँ, बहनें तथा विद्याधरियाँ आयीं ॥ १०९॥ राक्षसियाँ, पितरों की कन्यायें तथा दूसरी लोक माताएँ भी आयीं । इसके बाद इन देवियों तथा उनकी बहुओं के साथ सावित्री ने जाना चाहा ॥११०॥ उसी समय अदिति आदि दक्ष की कन्याएँ आयीं । उन सबों के साथ कमलालया ब्रह्माजी की पत्नी सावित्री देवी जाना चाहों ॥१११॥ कुछ देवियाँ मिठायी लेकर आयी थीं, कुछ फल तथा मोदक से परिपूर्ण शूप लेकर ब्रह्माजी के पास गयीं ॥११२॥ कुछ देवियाँ आढकी तथा निष्पावा लेकर गयीं। कुछ सुन्दर दाडिम (अनार) तथा मातुलिङ्ग फल लेकर गयीं ॥११३॥ कुछ देवियाँ करीर पुष्पों तथा कमल पुष्पों को लेकर गयीं । दूसरी देवियाँ कुसुम्भ, कंजीर, तथा खजूर ले लीं ।११४॥ दुसरी देवियों ने उत्तम नारियल के फलों को ले लिया । कुछ नारियाँ द्राक्षा से भरे हुए पात्र तथा शृंगाटक, कर्पूर, अद्भुत प्रकार के जामुन, अखरोट |
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