Srishti Khanda Extracted Page 212

Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-212

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Sanskrit Original

अगर्हणीयो न च गर्हतेऽन्यान् स वै विप्रः प्रवरं स्वात्मनीक्षेत् । विनीतमोहोप्यपनीतकल्मषो न चेह नामुत्र चयोर्थमृच्छति ॥३९०॥ अरोषमोहः समलोष्टकांचनः प्रहीणशोको गतसंधिविग्रहः । अपेतनिंदास्तुतिरप्रियाप्रियश्चरन्नुदासीनवदेवभिक्षुः ॥३९९॥ इतिश्रीपद्ममहापुराणे प्रथमे सृष्टिखंडे क्षेत्रवासमाहात्म्यं नाम पंचदशोध्यायः ॥१५॥ Se सोलहवाँ अध्याय भीष्म उवाच यदेतत्कथितं ब्रहांस्तीर्थमाहात्म्यमुत्तमम् । कमलस्याभिपातेन तीर्थजातं धरातले ॥९॥ तत्रस्थेन भगवता विष्णुना शेकरेण च । यत्कृतं मुनिशार्दूल तत्सर्वं परिकोर्त्तय ॥२॥ कथं यज्ञो हि देवेन विभुना तत्र कारितः । के सदस्या ऋत्विजश्च ब्राह्मणा: के समागताः ॥३॥ केभागास्तस्य यज्ञस्य किं द्रव्यं का च दक्षिणा । का वेदी किंप्रमाणं च कृतं तत्र विरिंचिना॥४॥ यो याज्यः सर्वदेवानां वेदैः सर्वत्रपठ्यते। कं च काममभिध्यायन्वेधा यज्ञ चकार ह ॥५॥ यथासौ देवदेवेशो ह्याजरश्चामरश्च ह । तथा चैवाक्षयः स्वर्गस्तस्य देवस्य दृश्यते॥६॥ होता है और न तो वह किसी की निन्दा ही करता है । वही अपनी आत्मा में परमात्मा का साक्षात्कार करता है । वह मोह त्वा पापों से दूर रहता है । किसी भी लौकिक अथवा पारलौकिक वस्तु की कामना नहीं करता है ॥३९०॥ वह न तो रेष करता है और न मोह करता है, वह मिट्टी के ढेले तथा सुवर्ण को एक समान समझता है । वह शोक से तवा सन्धि एवं विग्रह से रहित होता है । वह निन्दा तथा स्तुति से रहित तथा प्रिय एवं अप्रिय से रहित होकर संसार मे उदासीन होकर विचरण करता है । इस तरह श्रीपद्ममहापुराण के प्रथम सृष्टिखण्ड के क्षेत्रवास माहात्म्य नामक पन्द्रहवें अध्याय का शिवप्रसाद द्विवेदी (श्रीधराचार्य) कृत हिन्दी अनुवाद सम्पूर्ण हुआ ॥१५॥ — कप ब्रह्मदेव कृत याग वर्णन, इन्द्र के द्वारा लायी गयी गोपकन्या गायत्री के साथ ब्रह्माजी का परिणय, ब्रह्माजी द्वारा एक हजार युग पर्यन्त यज्ञ किया जाना भीष्मजी ने कहा- हे ब्रह्मन् ! आपने यह तीर्थ का उत्तम माहात्म्य बतलाया है । आपने यह भी बतलाया है कि कमल के गिरने के स्थान पर पृथिवी पर वह तीर्थ बन गया ॥१॥ वहाँ पर स्थित भगवान् विष्णु तथा शङ्करजी ने क्या किया ? हे मुनिश्रेष्ठ ! उन लोगों के द्वारा जो किया गया उसे आप मुझे सुनायें ॥२॥ वहाँ पर व्यापक देव ब्रह्माजी ने यज्ञ कैसे कराया । उस यज्ञ के सदस्य तथा ऋत्विज कौन थे ? वहाँ पर कौन ब्राह्मण आये 2॥३॥ उस यज्ञ के कौन-कौन से भाग थे हवनीय द्रव्य क्या था और उस यज्ञ की दक्षिणा क्या थी ? वहाँ पर बह्याजी ने किसको वेदी बनाया तथा उस वेदी का प्रमाण क्या था 2॥४॥ जो सभी देवताओं के याज्य (अर्चनीय) हैं, तथा जिनका सभी

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