Srishti Khanda Extracted Page 148

Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-148

padma-puranasrishti-khandacreation-cosmologypartialpage-extract

Sanskrit Original

रुक्मिणी सत्यभामा च सत्या नाग्रिजिती तथा । सुमित्रा च तथा शैब्या गांधारी लक्ष्मणा तथा ॥१५१॥ सुभीमा च तथा माद्री कौसल्या विजया तथा । एवमादीनि देवीनां सहस्राणि च षोडश ॥१५२॥ रुक्मिणी जनयामास पुत्रान् शृणु विशारदान् । चारुदेष्णं रणेशूरं प्रद्युप्छ महाबलम् ॥१५३॥ सुचारुं चारुभद्रञ्च सदश्वं ह्वस्वमेव च । सप्तमञ्चारुगुप्तञ्च चारु भद्रश्च चारुकं ॥१५४॥ चारुहासं कनिष्ठञ्च कन्याञ्जारुमतीं तथा। जज्ञिरे सत्यभामाया भानुर्भीमरथः क्षणः ॥१५५॥ रोहितो दीप्तिमांश्चैव ताग्रबंधो जलंधमः। चतस्त्रो जज्ञिर तेषां स्वसारश्च यवीयसीः॥१५६॥ जांबवत्या: सुतो जज्ञे सांबश्चेवातिशोभनः । सौरशास्त्रस्य कर्ता वै प्रतिमा मंदिरस्य च ॥१५७॥ मूलस्थाने निवेशश्च कृतस्तेन महात्मना । तुष्टेन देवदेवेन कुष्ठरोगो विनाशितः ॥१५८॥ सुमित्रं चारुमित्रं च मित्रविंदा व्यजायत। मित्रबाहुः सुनीथश्च नाम्नजित्यां बभूवतुः ॥१५९॥ एवमादीनि पुत्राणां सहस्त्राणि निशामय । अशीतिश्च सहस्राणां वासुदेवसुतास्तथा ॥१६०॥ प्रद्युपरस्य चदायादो वैदर्भ्या बुद्धिसत्तमः । अनिरुद्धो रणे योद्धा जज्ञेऽस्य मृगकेतनः ॥१६९॥ काम्या सुपार्श्वतनया सांबंलेभे तरस्विनम्। सत्त्वप्रकृतयो देवाः पराः पंचप्रकीर्तिताः ॥१६२॥ तिस्रः कोठ्यः प्रवीराणां यादवानां महात्मनाम् । षष्टिः शतसहस्राणि वीर्यवंतो महाबलाः ॥१६३॥ देवांशाः सर्व एवेह उत्तपन्नास्ते महौजसः । दैवासुरे हता ये वा असुरास्तु महाबलाः ॥९६४॥ इहोत्पन्ना मनुष्येषु बाधंते सर्वमानवान् । तेषामुद्धरणार्थाय उत्पन्ना यादवे कुले॥१६५॥ कुलानां शतमेकं च यादवानाम्महात्मनाम् । विष्णुस्तेषां प्रणेता च प्रभुत्वे च व्यवस्थितः ॥१६६॥ निदेशस्थायिनस्तस्य ऋहद्भ्यंते सर्वयादवाः । ` की व्यवस्था करने के लिए तथा असुरों का नाश करने के लिए वृष्णिवंश में अवतीर्ण हुए ॥१५०॥ रुक्मणी, सत्यभामा, सत्या, नाग्नजिती, सुमित्रा, शैव्या, गांधारी, लक्ष्मणा ॥१५१॥ सुभमा, माद्री, कौसल्या, विजया इत्यादि उनकी सोलह हजार पत्नियाँ हुयी ॥१५२॥ रुक्मिणी ने जिन पुत्रों को उत्पन्न किया उनका नाम सुनो । युद्ध करने में शूरवीर चारुदेष्ण, महाबलवान् प्रद्युम्न ॥१५३॥ सुचारु, चारुभद्र, सदश्व, हस्व, सातवें चारुगुप्त, चारुभद्र, चारुक।। १५४॥ सबसे छोटा चारुहास, तथा चारुमती कन्या को रुक्मिणी ने जन्म दिया । सत्यभामा के पुत्र भानु, भीमरथ, क्षण रोहित, दीप्तिमान, ताम्रबंध, और जलंधम । उन सबों की चार छोटी बहनें भी हुयी ॥१५५-१५६॥ जाम्बवती के अत्यन्त सुन्दर पुत्र साम्ब हुए, वै सौर शास्त्र के प्रणेता तथा मन्दिर की प्रतिमा के निर्माता हुए ॥१५७॥ उन्होंने मूल स्थान में श्रीभगवान् का निवेश किया । इससे प्रसन्न होकर भगवान् ने उनके कुष्ठ रोग को विनष्ट कर दिया ॥१५८॥ मित्रविन्दा नामक श्रीभगवान् की पत्नी ने सुमित्र तथा चारुमित्र नामक दो पुत्रों को उत्पन्न किया । नाम्नजीती के भी गर्भ से दो पुत्र ही हुए मित्रबाहु और सुनीथ ॥१५९॥ इसतरह से भगवान् के हजारो पुत्रों को सुनो । भगवान् वासुदेव के अस्सी हजार पुत्र हुए ॥१६०॥ प्रद्युम्न की वैदभी पत्नी के गर्भ से अनिरुद्ध का जन्म हुआ । उनके पुत्र मृगकेतन थे। ये प्रख्यात योद्धा थे ॥ १६१॥ काम्या नाम की सुपार्श्व की पुत्री ने साम्ब के पुत्र तरस्वी को जन्म दिया । सात्विक प्रकृति वाले पाञ्च देवता बतलाये गये हैं ॥१६२।। यादववीरों की संख्या तीन करोड़ साठ लाख बतलायी गयी है॥ १६३॥ वे सबके सब देवताओं के अंश से उत्पन्न बतलाये जाते हैं । अथवा देवासुरं संग्राम में जो महाबलवान्दैत्य मारे गये वे सब संसार में उत्पन्न होकर सभी मनुष्यों को दुःख देते थे, उन सबों का उद्धार करने के लिए वे देवता यादवकुल में उत्पन्न हुए थे ॥१६४-१६५॥। यादव महात्माओं के एक सौ एक वंश थे । उन सभी वंशों के

No translation available yet.

Spotted a mistake or have a question? Sign in to let us know