Srishti Khanda Extracted Page 127
Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-127
Sanskrit Original
सदर्भहस्तेनेकेन गृहे श्राद्धं गमिष्यति । पुण्यं पवित्रमायुष्यं सर्वपापविनाशनम् ॥९ २॥ ब्रह्मणा चैव कथितं तीर्थश्राद्धानुकीर्तनम् । श्रृणोति यःपठेद्वापि श्रीमान्संजायते नरः ॥९३॥ श्राद्धकाले च वक्तव्यं तथा तीर्थनिवासिभिः। सर्वपापोपशांत्यर्थमलक्ष्मीनाशनं मतम् ॥९ ४॥ इदं पदित्रं यशसो निधान, मिदं महापातकनाशनंच । ब्रह्मार्करुद्रैरभिपूजितं च, श्राद्धस्यमाहात्म्यमुशंति तज्ज्ञाः ॥९५॥ इति श्रीपदममहापुराणे प्रथमे सृष्टिखंडे श्राद्धप्रकरणं नाम एकादशोऽध्यायः ॥ १ १॥ — ke बारहवाँ अध्याय भीष्म उवाच सोमवंशः कथं जातःकथयात्र विशारद । तद्वंशे के तु राजानो बभूवुः कीर्तिवर्द्धना: ॥१॥ पुलस्त्य उवाच आदिष्टो ब्रह्मणा पूर्वमत्रिः सर्गविधौ पुरा । अनुतरंनामतपः सृष्ट्यर्थं तप्तवान्विभुः ॥२॥ यदानंदकरं ब्रह्म भगवन्क्लेशनाशनम् । ब्रह्मरुद्रेन्धसूर्याणामभ्यन्तरमतींद्रियम् ॥३॥ एक हाथ में कुश लेकर घर में श्राद्ध करना चाहिए । यह श्राद्ध का वर्णन पवित्र, पुण्यप्रद, आयु प्रदान करने वाला तथा सभी पापों को विनष्ट करने वाला होता है ॥९२॥ यह तीर्थ श्राद्ध कीर्तन ब्रह्माजी ने वणित किया है । जो व्यक्ति इसका श्रवण करता है अथवा इसे पढता है वह ऐश्वर्य से सम्पन्न हो जाता है ॥९३॥ श्राद्ध के समय तीर्थ वासियों को इस अध्याय का पाठ करना चाहिए ऐसा करना सभी पापों का नाश करता है तथा अलक्ष्मी का नाश करता हे।९४। विज्ञपुरुष जानते हैं कि यह अत्यन्त पवित्र, यश को बढाने वाला, महापातकों का नाश करने वाला है । यह श्राद्ध का माहात्म्य ब्रह्मा, रुद्र तथा सूर्य से सम्मानित है ॥९५॥ इस तरह श्रीपद़ममहापुराण के प्रथम सृष्टिखण्ड के श्राद्धप्रकरण नामक ग्यारहवें अध्याय का शिवप्रसाद द्विवेदी (श्रीधराचार्य) कृत हिन्दी अनुवाद सम्पूर्ण हुआ ।। ११।। re चन्द्रवंश का वर्णन, चन्द्रमा के यज्ञ का वर्णन, चन्द्रमा द्वारा तारा का हरण, बृहस्पति के प्रार्थना करने पर भी चन्द्रमा ने जब तारा को नहीं लौटाया तो रुद्र के द्वारा युद्ध किए जाने के बाद चन्द्रमा का तारा को लौटाना । तारा के गर्भ से चन्द्रमा के पुत्र बुध की उत्पत्ति, बुध के पुत्र पुरुरवा की उत्पत्ति, पुरूरवा का चरित्र, पुरुरवा के वंश का वर्णन, बृहस्पति द्वारा रजि के पुत्र का मोहन, तथा कार्तवीर्य (सहस्रार्जुन) के नाम स्मरण का माहात्म्य भीष्मजी ने कहा-- हे विशारद ! आप यह बतलायें की सोमवंश कैसे हुआ ? इस वंश में कौन-कौन सेप्रख्यात राजा हुए ॥१॥ पुलस्त्य महर्षि ने कहा-- प्राचीन काल में ब्रह्माजी ने अत्रि महर्षि को सृष्टि करने के लिए कहा उसके बाद अत्रि महर्षि सृष्टि करने के लिए उपयोगी शक्ति प्राप्त करने के लिए अनंतर नामक तप किया आनन्दप्रद क्लेश को नष्ट करने वाले पखंबह्म श्रीभगवान् ब्रह्मा, रुद्र, इन्द्र तथा सूर्य के भीतर जिस अतीन्द्रिय तप को
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