Srishti Khanda Extracted Page 86

Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-86

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Sanskrit Original

ततस्तु मेरुसावर्णिर्ब्रह्मसूनुर्मनुः स्मृतः । ऋभुश्च ऋतुधामाच विष्वक्सेनो मनुस्तथा ॥११२॥ अतीतानागतांश्चैव मनवःपरिकीर्तिताः । वर्षाणां युगसाहस्तरमेभिर्व्याप्तंनराधिप ॥ १ १ ३॥ स्वे स्वेन्तरे सर्वमिदं समुत्पाद्य चराचरम्। कल्पक्षये निवृत्ते तु मुच्यंते ब्रह्मणा सह॥९११४॥ अमी युगसहस्रान्ते विनश्यन्ति पुनः पुनः । ब्रह्ाद्याविष्णुसायुज्यं ततो यास्यंति वै नृप ॥११५॥ इति श्रीपदामहापुराणे प्रथमे सृष्टिखंडे मन्वंतरवर्णनं नाम सप्तमोध्यायः ॥७॥ "ण्य आठवों अध्याय भोष्म उवाच बहुभिर्धरणी भुक्ता भूपालैः श्रूयते पुरा। पार्थिवाः पृथिवीयोगात्पूथ्वि कस्य योगतः ॥१॥ किमर्थं च कृता संज्ञा भूमेस्सा पारिभाषिकी । गौरितीयं च संज्ञा वा भुवः कस्माद्ववीहि मे ॥२॥ पुलस्त्य उवाच पुरा कृतयुगस्यासीदंगो नाम प्रजापतिः । मृत्योस्तु दुहिता तेन परिणीतातिदुर्मुखी ॥३॥ सुनीथा नाम तस्यास्तु वेनो नाम सुतः पुरा । अधर्मनिरतः कामी बलवान्वसुधाधिपः ॥४॥ लोकस्याधर्मकृच्चापि परभार्यापहारकः। अथ तस्य प्रसिद््यर्थं जगदर्थ महर्षिभिः ॥५॥ बतलाये गये हैं ॥११०॥ रुचि प्रजापति के पुत्र रौच्य होंगे । इसीतरह भूति के पुत्र भौत्य मनु होंगे ॥१११॥ उसके बाद ब्रह्माजी के पुत्र ब्रह्मसावणि मनु होंगे । उसके बाद, ऋभु, ऋतुधामा या वीतधामा तथा विष्वक्सेन मनु होंगे। १ १२॥ मैंने तुम्हें अतीत कालिक तथा अनागत (भविष्यत्) कालिक मनुओं को बतलाया । हे नराधिप ! ये सभी मनु मिलकर एक हजार चतुर्युग पर्यन्त अधिकार प्राप्त रहते हैं ॥११३॥ ये सभी अपने-अपने मन्वन्तर में इस सम्पूर्ण चराचर को उत्पन्न करके, कल्प की समाप्ति होने पर ब्रह्माजी के ही साथ मुक्त हो जाते हैं ॥११४॥ ये सभी एक हजार चतुर्युग के बीत जाने पर बार-बार विनष्ट होते हैं और हे राजन् !ये ब्रह्मा, विष्णु आदि के सायुज्य को प्राप्त करते हैं ॥११५॥ इसतरह श्रीपद्ममहापुराण के प्रथम सृष्टिखण्ड के मन्वन्तर वर्णन नामक सातवें अध्याय का शिवप्रसाद द्विवेदी (श्रीधराचार्य) कृत हिन्दी अनुवाद सम्पूर्ण हुआ —— ke पृथुचरित्र तथा सूर्यवंश का वर्णन भीष्मजी ने कहा-- हे गुरो ! सुना जाता है कि प्राचीन काल में इस पृथिवी पर अनेक राजा हुए । पृथिवी का सम्बन्ध होने के कारण राजाओं को पार्थिव कहा जाता है, किन्तु भूमिका पृथ्वी नाम किसके सम्बन्ध से हुआ?॥ १॥ भूमि का पारिभाषिक यह नाम क्यों हुआ ? अथवा भूमि का गौ नाम क्यों हुआ ? इसे आप मुझे बतलाएँ ॥२॥ पुलस्त्य महर्षि ने कहा-- पहले सत्ययुग में अङ्ग नामक प्रजापति हुए । उन्होने मृत्यु की पुत्री सुनीथा से विवाह किया । सुनीथा का मुँह कुरूप था । सुनीथा के पुत्र वेन हुए । वे कामी, बलवान् तथा अधर्म परायण राजा थे ॥३-४॥ संसार के पापों को करने वाले वे दूसरों की पत्नी का अपहरण कर लेते थे । उसके बाद उस राजा तथा

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