Srishti Khanda Extracted Page 83

Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-83

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Sanskrit Original

नक्षत्रताराद्विजवृक्षगुल्म लतावितानस्य च रुक्मगर्भम् । अपामधीशं वरुणं धनानां राज्ञा प्रभुर्वै श्रवणं च तद्वत् ॥७०॥ विष्णुं रवीणामधिपं वसूना मग्निं च लोकाधिपतिं चकार । प्रजापतीनाधिपं च दक्षं चकार शक्रं मरुतामधीशम् ॥७१॥ दैत्याधिपानामथदानवानां प्रह्मादमीशं च यमं पितृणाम् ¦ पिशाचरक्षः पशुभूतयक्ष बेतालराजं ह्ाथशूलपाणिम् ॥७२॥ प्रालेयशैलं च पतिं गिरीणा मीशं समुद्रं सरितामधीशम् । गंधर्वविद्याधरकिन्नराणा मीशं पुनश्चित्ररथं चकार ॥७३॥ नागाधिपं वासुकिमुग्रवीर्यं सर्पाधिपं तक्षकमादिदेश । दिग्वारणानामधिपं चकार गजेंद्रमैरावणनामधेयम् ॥७४॥ सुपर्णमीशं पततामथार्वतां राजानमुच्चैःश्रवसं चकार । सिंहं मृगाणां वृषभं गवां च प्लक्षं पुनः सर्ववनस्पतीनाम् ॥७५॥ पितामहः पूर्वमथाभ्यषिंच देतन्पुनः सर्वदिशाधिनाथान् । पूर्वेशदिक्यालमथाभ्यषिंचत् नाम्ना सुपर्वाणमरगतिकेतुम् ॥७६॥ ततोधिपं दक्षिणतश्चकार सर्वेश्वरं शंखपदाभिधानम् । सकेतुमंतं दिगधीशमीशं चकार पश्चाद्धुवनांडगर्भः ॥७७॥ हिरण्यरोमाणमुदग्दिगीशं प्रजापतिं मेघसुतं चकार । अद्यापि कुर्वन्तिदिशामधीशाः सदावहंतस्तु भुवोभिरक्षाम् ॥७८॥ चतुर्भिरेतैः पृथुनामधेयो नृपोभिषिक्तः प्रथमः पृथिव्याम् । गतेंतरे चाक्षुषनामधेये वैवस्तंचक्कुरिमं पृथिव्याम् ॥७९॥ बनाया । जल का स्वामी वरुण को तथा धन का स्वामी कुबेर को बनाया ॥७०॥ विष्णु को आदित्यों का स्वामी बनाया और अग्नि को वसुओं का स्वामी बनाया । ब्रह्माजी ने प्रजापतियों का स्वामी दक्ष को, और देवताओं का स्वामी इन्द्र को बनाया ॥७१॥ उन्होंने दानवों तथा दैत्याधिपों का स्वामी प्रहद को और पितरों का स्वामी यम को बनाया । पिशाचों, राक्षसो, पशुओं, भूतो, यक्षों तथा बेतालों का स्वामी शङ्करजी को बनाया ॥७२॥ उन्होंने पर्वतों का स्वामी हिमालय को और नदियों का स्वामी समुद्र को बनाया । उन्होंने गन्धर्व, विद्याधर तथा किन्नरों का स्वामी चित्ररथ को बनाया ॥७३॥ नागों का स्वामी महापराक्रमी वासुकि को बनाया और सपों का स्वामी तक्षक को बनाया । उन्होंने दिग्गजों का स्वामी ऐरावण नामक गजेन्द्र को बनाया ॥७४॥ उन्होंने पक्षियों का स्वामी सुपर्ण (गरुड) को बनाया तथा अश्वों का स्वामी उच्चैःश्रवा को बनाया । मृगों का स्वामी सिंह को, गौओं का स्वामी सांड को तथा समस्त , वनस्पतियों का स्वामी प्लक्ष (पाकड़) को बनाया ॥७५॥ ब्रह्माजी ने पहले इन सबों को राजपद पर अभिषिक्त किया इसके बाद उन्होंने सभी दिशाओं के स्वामियों को नियुक्त किया । उन्होंने पूर्व दिशा का दिक्पाल सुवर्मा नामक . अरातिकेतु को बनाया ॥७६॥ उसके बाद उन्होंने दक्षिण दिशा के स्वामी शंख को बनाया । इसके बाद उन्होंने पश्चिम दिशा का स्वामी शङ्करजी को बनाया ॥७७॥ ब्रह्माजी ने उत्तर दिशा का अधीश अपने प्रजापति पुत्र को बनाया ये दिशाओं के स्वामी आज भी सदा पृथिवी की रक्षा करते हैं ॥७८॥ इन चारों के द्वारा सर्वप्रथम पृथिवी पर पृथु नामक cd

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