Srishti Khanda Extracted Page 79
Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-79
Sanskrit Original
Ei श्रीपद्ममहापुराण तस्मादुपरि ब्रह्माणं सौवर्ण पद्मकोटरे ।कुर्यात् शर्करयोपेतां सावित्रीं तस्य वामतः ॥१३॥ गंधं धूपं तयोर्द्याद्रीतं वाद्यं च कारयेत् । तदभावे कर्थकुर्याद्य॒था पदो पितामहः ॥१४॥ ब्रह्माह्नयां च प्रतिमां कृत्वा गुडमयीं शुभाम् । शुक्लपुष्पाक्षततिलैरर्चयेत्पदासंभवम् ॥१५॥ ब्राह्ाय पादौ संपूज्य जंघे सौभाग्यदाय च। विरिंचायोरुयुग्मं च मन्मथायेति वै कटिम् ॥१६॥ स्वच्छोदरायेत्युदरत्युदरमतंद्रायेत्युरो विधेः । मुखं पद्ममुखायेति बाहू वै वेदपाणये ॥१७॥ नमः सर्वात्मने मौलिमर्च्चयेच्चापि पंकजम्। ततः प्रभाते तत्कुंभं ब्राह्मणाय निवेदयेत् ॥१८॥ ब्राह्मणं भोजयेद्धक्तूया स्वयं तु लवणं विना । भक्त्या प्रदक्षिणं दद्यादिमं मंत्रमुदीरयेत् ॥१९॥ : । हदये सर्वलोकानां यस्त्वानंदोभिधीयते ॥२०॥ अनेन विधिना सर्व मासि मासि समाचरेत्। उपवासी पौर्णमास्यामर्चयेद्वाह्ममव्ययम् ॥२१॥ फलमेकं च संप्राश्यशर्वर्या भूतले स्वपेत् । ततस्त्रयोदशे मासि घृतधेनुसमन्विताम् ॥२२॥ शय्यां दद्याद्विरिंचाय सर्वोपस्करसंयुताम् । ब्रह्माणं कांचनं कृत्वा सावित्रीं रजतैस्तथा ॥२३॥ पद्मात्मक: सृष्टिकर्ता सावित्रीमुपलभ्य तु । वस्रं सपत्नीकं पूज्यभक्तृया विभूषणैः ॥२४॥ शक्तया गवादिकं दद्यात््रीयतामित्युदीरयेत् । होमं शुक्लैस्तिलैः कुर्यादब्रह्मनामानि कीर्तयेत् ॥२५॥ गव्येन सर्पिषा तद्दत्पायसेन च धर्मवित् । विप्रेभ्योऽथ धनं दद्यात्पुष्पमालां च शक्तितः॥२६॥ शक्ति के अनुसार सुवर्ण से युक्त तथा गुड से युक्त ताम्र पात्र को उसके ऊपर रखे ॥१५२॥ उसके ऊपर कमल के बीच में ब्रह्माजी की सुवर्ण की मूर्ति स्थापित करे और उस मूर्ति की बायीं ओर शर्करा निर्मित सावित्री देवी की मूर्ति स्थापित करे ॥१३॥ फिर उन दोनों को धूप तथा दीप समर्पित करके, गीत तथा वाद्य कराये । उसके (सुवर्ण के) अभाव में कमल पर ब्रह्माजी की कैसे स्थापना करे 2॥१४॥ इसके उत्तर में महर्षि ने कहा सुवर्ण के अभाव में ब्रह्माजी की गुड की प्रतिमा बनाये और उसकी पूजा उजले पुष्प तथा उजले अक्षत एवं तिल (उजले) से करे ।ब्राह्माय नम: इस मंत्र से उनके चरणों की पूजा करे, सौभाग्यदाय नम: इस मंत्र से जंघों की पूजा करे, विरिंचाय नम: इस मंत्र से उनके दोनों ऊरुओं की पूजा करे । मन्मथाय नमः इस मंत्र से ब्रह्माजी की कटि की पूजा करे ॥१६॥ स्वच्छोदराय नम: इस मन्त्र से उदर की पूजा करे, अतन्द्राय नम: इस मन्त्र से उनके ऊरू भाग की पूजा करे । पद्ममुखाय नम: इस मन्त्र से मुख की पूजा करे । वेदपाणये नम: इस मन्त्र से दोनो बाहुओं की पूजा करे ॥१७॥ सर्वात्मने नम: इस मन्त्र से शिर तथा कमल की पूजा करे । उसके बाद सबेरा होने पर उस कलश को ब्राह्मण को दान कर दे ॥१८॥ उसके बाद भक्तिपूर्वक ब्राह्मण को भोजन कराये, किन्तु स्वयं नमक रहित भोजन करे भक्ति पूर्वक प्रीयताम इत्यादि मन्त्र का उच्चारण करे ॥१९॥ जो सभी जीवों के हृदय में विद्यमान रहकर आनन्द शब्द से अभिहित किए जाते हैं वे भगवान् ब्रह्माजी प्रसन्न हों कहकर प्रार्थना करे ॥२०॥ इसी प्रकार उसे सभी महिनों में पूजन करना चाहिए और पूर्णिमा के दिन उपवास करना चाहिए और ब्रह्माजी की पूजा करनी चाहिए ॥२१॥ उस दिन एक फल खाकर रात्रि में भूमि पर सोए, उसके बाद तेरहवें महीने में घृत एवं धेनु से युक्त ॥२२॥ ब्रह्माजी के लिए सभी सामग्री से युक्त शय्यादान करे । सुवर्ण की ब्रह्माजी की मूर्ति तथा चाँदी की सावित्री देवी की मूर्ति, कमलात्मक ब्रह्मा तथा सावित्री को स्पर्श करके पत्नी के साथ ब्राह्मण की वखों तथा भूषणों से पूजा करके ॥२३-२४॥ अपनी शक्ति के अनुसार गौ आदि का दान करके अन्त में कहे प्रीयताम् । फिर उजले तिल, गोघृत तथा पायस (खीर) से होम करके ब्रह्माजी के नामों का उच्चारण करे । फिर अपनी शक्ति के अनुसार ब्राह्मणों को धन तथा पुष्पमाला प्रदान
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