Srishti Khanda Extracted Page 56
Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-56
Sanskrit Original
उपयेमे पुनश्चैव याचित्वा भगवान् भवः । दाक्षी धातृविधातारौ भगो: ख्यातिरसूयत॥ २ ० ५॥ श्रियं च देवदेवस्य पत्ती नारायणस्य या ॥२०६॥ इतिश्रीपद्ममहापुराणे प्रथमे सृष्टिखंडे तृतीयोऽयायः ॥३॥ ञि चौथा अध्याय भीष्म उवाच क्षीराव्यौतु तथा लक्ष्मी: किलोत्पन्ना मया श्रुता । ख्यात्यां भृगोः समुत्पन्ना एतदाह कथं भवान् ॥१॥ कथं च दक्षदुहिता देहं त्यक्तवती शुभा। मेनायां गर्भसंभूतिमुमाया जन्म एव च॥२॥ किमर्थं देवदेवेन पत्नी हैमवती कृता । विरोधं चाथ दक्षेण भगवांस्तु व्रवीतु मे॥३॥ पुलस्त्य उवाच इदं च श्रृणु भूपाल यत्पृष्टोहमिह त्वया । श्रीसंबंधो मयाप्येष श्रुत आसीत्पितामहात् ॥४॥ अत्रिपुत्रस्तु दुर्वासाः परिभ्राम्यन्महीमिमाम् । विद्याधरीकरे मालां दृष्ट्वा सौगन्धिकी शुभाम् ॥५॥ याचयामास मे देहि जटाजूटे करोम्यहम् । इति विद्याधरी तेन पृष्टा सा ऋषिणा तथा ॥६॥ पत्नी के रूप में प्राप्त किया ॥२०१-२०३॥ उस सती ने दक्ष के प्रति कोप करके अपना शरीर त्याग दिया । हे राजश्रेष्ठ ! वह मेना के गर्भ से हिमालय की पुत्री के रूप में उत्पन्न हुयी ॥२०४॥ पुनः भगवान् शङ्कर ने याचना करके उसके साथ विवाह किया । दक्ष की पुत्री ख्याति देवी ने महर्षि भृगु के पुत्र के रूप में धाता एवं विधाता नामक पुत्रों को उत्पन्न किया ॥२०५॥ ख्याति देवी ने भगवान् नारायण की पत्नी श्रीदेवी को भी जन्म दिया ॥२०६॥ इस तरह श्रीपद्ममहापुराण के प्रथम सृष्टिखण्ड के तीसरे अध्याय का शिवप्रसाद ह्विवेदी (श्रीधराचार्य) कृत हिन्दी अनुवाद सम्पूर्ण हुआ ।।४।। —— re समुद्र मंथन के प्रसङ्ग में दुर्वासा महर्षि द्वारा इन्द्र को शाप, देवों तथा दैत्यों द्वारा समुद्र मंथन, समुद्र से सुरभि इत्यादि रत्नों की उत्पत्ति, लक्ष्मी की उत्पत्ति और लक्ष्मी द्वारा विष्णु का वरण, देवताओं द्वारा अमृत का पान, पुनः भृगु की पुत्री के रूप में लक्ष्मी की उत्पत्ति का वर्णन, भृगु महर्षि का भगवान् विष्णु को शाप, ब्रह्माजी द्वारा पुनः सृष्टि, नारदजी द्वारा ब्रह्माजी की सृष्टि का वर्णन, ब्रह्माजी द्वारा नारदजी को वरदान भीष्मजी ने कहा-- मैंने सुना है कि लक्ष्मीजी की उत्पति क्षीरसागर में हुयी है, फिर आपने कैसे कहा कि लक्ष्मीजी ख्याति देवी के गर्भ से उत्पन्न हुयी 2॥१॥ मङ्गलमयी दक्ष की पुत्री सती ने अपने शरीर का त्याग क्यों किया ? मेना के गर्भ से उमा की उत्पत्ति कैसे हुयी ?॥२॥ शङ्करजी ने हिमवान् पुत्री को अपनी पत्नी क्यों बनया ?। आप मुझे बतलाएँ कि भगवान् शङ्कर का दक्ष से विरोध क्यों हुआ ?॥३॥ पुलस्त्य महर्षि ने कहा-- राजन् ! आपने जो मुझसे पूछा है, उसे मैं आपको बतलाता हूँ । श्रीदेवी सम्बन्धी कथा मैंने भी पितामह (ब्रह्माजी) से सुना था॥४॥ महर्षि अत्रि के पुत्र दुर्वासा पृथिवी पर भ्रमण कर रहे थे, उन्होने किसी विद्याधरी के हाथ में अत्यन्त सुगन्धित माला
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