Srishti Khanda Extracted Page 26

Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-26

padma-puranasrishti-khandacreation-cosmologypartialpage-extract

Sanskrit Original

श्रीविष्णवे नमः श्रीपुराणपुरुषोत्तमाय नमः श्रीमन्महामुनि वेदव्यास प्रणीत श्रीपद्यमहापुराण पहला अध्याय मङ्गलाचरण ३ स्वच्छं चंद्रावदातं करिकरमकरक्षोभसंजातफेनम् । ब्रह्मोद्भूतिप्रसत्तैर्ब्रतनियमपरैः सेवितं विप्रमुख्यैः ॥ ॐ कारालंकृतेन त्रिभुवनगुरुणा ब्रह्मणादृष्टिपूतम् । संभोगाभोगरम्यं जलमशुभहरं पौष्करं वः पुनातु ॥१॥ सूतमेकांतमासीनं व्यासशिष्यं महामतिः। लोमहर्षणनामा वा उग्रश्रवसमाह तत् ॥२॥ ऋषीणामाश्रमांस्तात गत्वा धर्मान्समासतः । पृच्छतां विस्तराद्ब्रूहि यन्मत्तः श्रुतवानसि ॥३॥ वेदव्यासान्मया पुत्र पुराणान्यखिलानि च । तवाख्यातानि प्राप्तानि मुनिभ्यो वद विस्तरात् ॥४॥ प्रयागे मुनिवर्यैश्च यथा पृष्टः स्वयंप्रभुः। पृष्टेन चानुशिष्टास्ते मुनयो धर्मकांक्षिणः ॥५॥ देशं पुण्यमभीप्संतो विभुना च हितैषिणा। सुनाभं दिव्यरूपं च सत्यगं शुभविक्रमं ॥६॥ पुराण का उपक्रम और उसका स्वरूप जो चन्द्रमा के समान धवल एवं स्वच्छ है, जिसमें हाथी के सूंढ़ के समान आकार वाले घड़ियालों के सञ्चरण करने के कारण फेन उत्पन्न होता रहता है; ब्रह्माजी की उत्पत्ति की कथा वार्ता में संलग्न व्रत एवं नियम परायण श्रेष्ठ ब्राह्मण जिसका सेवन करते हैं, ओङ्कार का जप करने वाले ब्रह्माजी ने जिसे अपनी दृष्टि से पवित्र बना दिया है, जो पीने में अत्यन्त स्वादिष्ट तथा अपनी विशालता के कारण अत्यन्त रमणीय है, वह पुष्कर तीर्थ का, पापों को विनष्ट करने वाला जल; हम सबों को पवित्र बना दे॥१॥ एकान्त में बैठे हुए तथा व्यासजी के शिष्य उग्रश्रवा नामक सूत से महाबुद्धिमान रोमहर्षण नामक सूत ने कहा ॥२॥ हे वत्स ! ऋषियों के आश्रमों में जाकर जिन धर्मो का तुमने मुझसे संक्षेप में सुना है, उन धर्मो को उनके प्रश्नानुसार उन्हें विस्तार से सुनाओं ॥३॥ हे पुत्र ! महर्षि वेदव्यासजी से मैंने जिन पुराणों का श्रवण किया हैं, उन सबों को मैने तुम्हें सुना दिया है, उन सबां को तुम मुनिजनों को विस्तार पूर्वक सुनाओं ॥४॥ प्रयाग क्षेत्र में धर्म को चाहने वाले मुनियों ने जिस प्रकार से भगवान् नारायण से प्रश्न किया था और उन्होने जिस प्रकार से उन्हें उपदेश दिया उसे सुनो ॥५॥ वे ऋषि गङ्गा तट पर सर्वव्यापक तथा सर्वहितकारी श्रीभगवान् से

No translation available yet.

Spotted a mistake or have a question? Sign in to let us know